आय प्रमाण पत्र के नाम पर रिश्वत का आरोप, जांच में प्रथम दृष्टया दोषी लेखपाल—कार्रवाई लंबित

खबर की तहतक ✍️

जलालपुर, अम्बेडकरनगर।

एंटी करप्शन ब्यूरो की सख्ती के बावजूद सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार की शिकायतें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। ताजा मामला तहसील जलालपुर क्षेत्र से सामने आया है, जहां एक लेखपाल पर आय प्रमाण पत्र बनाने के नाम पर रिश्वत लेने का गंभीर आरोप लगा है। खास बात यह है कि शिकायत के साथ भुगतान से जुड़े साक्ष्य भी प्रस्तुत किए गए हैं, जिससे मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम लखनिया निवासी राजेश कुमार वर्मा ने आरोप लगाया है कि क्षेत्रीय लेखपाल मिथिलेश कुमार यादव ने आय प्रमाण पत्र बनाने के एवज में ₹500 की मांग की। पीड़ित के मुताबिक, 9 दिसंबर 2025 को उसने ऑनलाइन माध्यम से उक्त राशि का भुगतान किया, जिसकी ट्रांजेक्शन रसीद (UTR सहित) उसके पास उपलब्ध है।

पीड़ित का कहना है कि उसने निर्धारित प्रक्रिया के तहत आय प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया था, लेकिन तय समय सीमा में उसका कार्य पूरा नहीं किया गया। जब उसने संबंधित लेखपाल से संपर्क किया तो उससे “सुविधा शुल्क” की मांग की गई। मजबूरी में उसने भुगतान कर दिया, लेकिन इसके बावजूद भी प्रमाण पत्र समय पर जारी नहीं किया गया।

शिकायत के साथ संलग्न दस्तावेजों में ऑनलाइन भुगतान का स्क्रीनशॉट भी शामिल है, जिसमें संबंधित खाते में ₹500 ट्रांसफर होना दर्शाया गया है। इससे आरोपों को बल मिलता है और मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।

 

सूत्रों के अनुसार, मामले की प्राथमिक जांच राजस्व निरीक्षक द्वारा की गई, जिसमें संबंधित लेखपाल को सेवा नियमावली के विपरीत आचरण करते हुए अनुचित लाभ प्राप्त करने का प्रथम दृष्टया दोषी माना गया है। इसके बावजूद दिसंबर माह से अब तक जांच रिपोर्ट उच्च अधिकारियों के स्तर पर लंबित बताई जा रही है, जिससे कार्रवाई को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

पीड़ित ने उच्चाधिकारियों को दिए गए शिकायती पत्र में निष्पक्ष जांच कर दोषी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। साथ ही यह भी कहा है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो वह मामले को उच्च स्तर तक ले जाने को बाध्य होगा।

अब निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं कि आखिर इस मामले में कब तक ठोस कदम उठाए जाते हैं और दोषियों को जवाबदेह बनाया जाता है।

नोट – इस खबर की पुष्टि खबर की तहतक न्यूज़ पोर्टल नहीं करता है। पीड़ित के द्वारा दिए गए साक्ष्यों के आधार पर खबर प्रसारित किया गया है।

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