खबर की तहतक ✍️ जलालपुर, अंबेडकरनगर। हिन्दू नववर्ष संवत 2083 के शुभ अवसर पर कस्बे में आस्था, उल्लास और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। उष्मापुर स्थित शिवाला घाट पर श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से हवन-पूजन कर दीप प्रज्वलित किए, जिससे पूरा घाट दीपों की रोशनी से जगमगा उठा और वातावरण भक्तिमय हो गया। नव संवत्सर के उपलक्ष्य में पौराणिक तमसा नदी के तट पर भव्य दीपोत्सव का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। लोगों ने दीप जलाकर सुख-समृद्धि, शांति और समाज के कल्याण की कामना की। कार्यक्रम के दौरान भजन-कीर्तन एवं धार्मिक अनुष्ठानों ने माहौल को पूरी तरह आध्यात्मिक रंग में रंग दिया। इस अवसर पर भाजपा अयोध्या प्रभारी मिथिलेश त्रिपाठी, जिलामंत्री पंकज वर्मा, पूर्व नगर अध्यक्ष संजीव मिश्रा, निवर्तमान अध्यक्ष देवेश मिश्रा, नगर अध्यक्ष संदीप अग्रहरी, सभासद अजीत निषाद, आशीष सोनी, मनोनीत सभासद आसाराम मौर्य, सुरेश गुप्ता, विकास सोनकर, अरुण उपाध्याय, रामवृक्ष भार्गव सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। आस्था के साथ उठी चिंता की आवाज कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने तमसा नदी की वर्तमान दुर्दशा पर गहरी चिंता व्यक्त की। लोगों ने कहा कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा सर्वेक्षण किए जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस सुधार नजर नहीं आया है। स्थानीय नागरिकों के अनुसार, जगह-जगह कूड़े के ढेर और कस्बे के अधिकांश नालों का गंदा पानी सीधे नदी में गिर रहा है, जिससे इसका प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो गया है। कभी जीवनदायिनी मानी जाने वाली तमसा नदी अब धीरे-धीरे गंदे नाले में तब्दील होती जा रही है, जो जलजनित बीमारियों का कारण बन रही है। प्रशासन से की गई मांग श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने प्रशासन व जनप्रतिनिधियों से जल्द से जल्द ठोस कदम उठाने की मांग की, ताकि नदी की साफ-सफाई और पुनर्जीवन सुनिश्चित किया जा सके। आस्था और पर्यावरण के इस संगम में जहां एक ओर दीपों की रोशनी ने श्रद्धा का संदेश दिया, वहीं दूसरी ओर नदी को बचाने की आवाज ने समाज को एक महत्वपूर्ण संदेश भी दिया। Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Like this:Like Loading… Related Post navigation मोबाइल रिकवरी सेल की बड़ी कामयाबी: 125 गुम मोबाइल बरामद, करीब 25 लाख की संपत्ति लौटाई गई फर्जी एनकाउंटर’ पर हाईकोर्ट सख्त: 24 साल बाद न्याय की किरण, 45 दिन में मुआवजे पर फैसला जरूरी