यूपी में संपत्ति रजिस्ट्री का नया नियम: अब एक घंटे के स्लॉट में ही करानी होगी रजिस्ट्री, 1 अप्रैल से लागू

खबर की तहतक ✍️

लखनऊ/गोरखपुर।

उत्तर प्रदेश में संपत्ति की रजिस्ट्री प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए सरकार ने नया नियम लागू करने का निर्णय लिया है। नई व्यवस्था के तहत अब रजिस्ट्री के लिए बुक किए गए स्लॉट के भीतर ही दस्तावेजों का पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। निर्धारित एक घंटे की समय-सीमा में रजिस्ट्री पूरी नहीं होने पर स्लॉट स्वतः निरस्त हो जाएगा। यह नई व्यवस्था 1 अप्रैल 2026 से पूरे प्रदेश में प्रभावी हो जाएगी।

जानकारी के अनुसार निबंधन विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर स्लॉट बुकिंग से संबंधित सूचना भी जारी कर दी गई है। अभी तक रजिस्ट्री के लिए पूरे दिन का स्लॉट मिलता था, लेकिन नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक आवेदक को केवल एक घंटे का समय दिया जाएगा। इसी अवधि में क्रेता और विक्रेता को उपस्थित होकर रजिस्ट्री प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि रजिस्ट्री कार्यालय सुबह 10 बजे से खुल जाते हैं, लेकिन अधिकांश अधिवक्ता दोपहर बाद ही क्रेता-विक्रेता को लेकर पहुंचते हैं। इससे दोपहर में अत्यधिक भीड़ हो जाती है और दस्तावेजों की सही तरीके से जांच करना कठिन हो जाता है। नई व्यवस्था लागू होने से भीड़ कम होगी और दस्तावेजों की जांच के लिए अधिकारियों को पर्याप्त समय मिल सकेगा।

इस बीच अधिवक्ताओं और दस्तावेज लेखकों के बीच यह चर्चा भी चल रही है कि कई बार सर्वर की समस्या के कारण रजिस्ट्री प्रक्रिया प्रभावित होती है। ऐसी स्थिति में यदि सर्वर ठप हुआ तो कुछ लोगों की रजिस्ट्री प्रभावित हो सकती है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

स्टांप एवं निबंधन विभाग के एआईजी स्टांप संजय दुबे ने बताया कि 1 अप्रैल से यह नई व्यवस्था लागू कर दी जाएगी और इसके संबंध में अधिवक्ताओं व दस्तावेज लेखकों को भी जानकारी दी जा रही है, ताकि वे क्रेता-विक्रेता को समय से अवगत करा सकें।

इसके साथ ही विभाग रजिस्ट्री से जुड़े नियमों में कुछ और बदलाव की तैयारी भी कर रहा है। प्रस्तावित मसौदे के अनुसार कुछ विशेष प्रकार की संपत्तियों के दस्तावेजों के पंजीकरण पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है। रजिस्ट्री से पहले संपत्ति की सही पहचान सुनिश्चित की जाएगी और स्वामित्व, अधिकार व कब्जे से जुड़े आवश्यक दस्तावेज लगाना अनिवार्य होगा। यदि आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं होंगे तो पंजीकरण अधिकारी रजिस्ट्री करने से इनकार भी कर सकेगा।

नई व्यवस्था को लागू करने का उद्देश्य रजिस्ट्री प्रक्रिया को पारदर्शी, सुचारु और समयबद्ध बनाना बताया जा रहा है। वहीं सरकार का मानना है कि इससे फर्जीवाड़े और अव्यवस्था पर भी प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा।

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