खबर की तहतक | अम्बेडकरनगर क्या किसी नागरिक के निर्माण कार्य को बिना मौके की वास्तविक जांच के रोका जाना उचित है? यह सवाल मालीपुर थाना क्षेत्र के कंदीपुर गांव में सामने आए एक मामले के बाद चर्चा का विषय बन गया है। ग्राम कंदीपुर निवासी शीला देवी पत्नी अवधेश नारायण मिश्र ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया है कि उनकी निजी भूमि पर चल रहे मकान निर्माण कार्य को बिना सक्षम राजस्व अधिकारी द्वारा स्थलीय निरीक्षण किए ही रोक दिया गया। पीड़िता का कहना है कि निर्माण कार्य पूरी तरह उनकी निजी भूमि पर हो रहा है तथा सरकारी रास्ते को सुरक्षित छोड़ दिया गया है। बताया जाता है कि कुछ लोगों की शिकायत के आधार पर यह रिपोर्ट प्रस्तुत की गई कि निर्माण कार्य सरकारी रास्ते पर किया जा रहा है। हालांकि पीड़िता का दावा है कि आज तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति की जांच नहीं की है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि जांच ही नहीं हुई, तो निर्माण कार्य रोकने का आधार क्या रहा? शीला देवी ने प्रशासन के समक्ष अपनी बात रखते हुए कहा है कि यदि सक्षम अधिकारी जांच कर यह साबित कर दें कि सरकारी रास्ते पर एक इंच भी निर्माण हुआ है, तो वह प्रशासन की कार्रवाई स्वीकार करने को तैयार हैं। वहीं यदि निर्माण उनकी निजी भूमि पर पाया जाता है तो उन्हें न्याय मिलना चाहिए तथा भ्रामक जानकारी देने वालों के विरुद्ध भी कार्रवाई होनी चाहिए। निर्माण कार्य रुकने से परिवार आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। ईंट, सीमेंट, सरिया, गिट्टी सहित निर्माण सामग्री खुले में पड़ी हुई है और बरसात का मौसम सिर पर है। ऐसे में सामग्री के खराब होने का खतरा बढ़ गया है, जिससे लाखों रुपये के नुकसान की आशंका जताई जा रही है। पीड़ित परिवार का कहना है कि वह मानसिक, आर्थिक और सामाजिक दबाव भी झेल रहा है। प्रार्थना पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि गांव के कई लोगों ने लिखित रूप से बताया है कि रास्ते पर कोई अवरोध नहीं है और किसी ग्रामीण को आवागमन में परेशानी नहीं हो रही है। इसके बावजूद निर्माण कार्य रुकने से परिवार खुद को असहाय महसूस कर रहा है। अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं। यदि मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होती है तो न केवल वास्तविक स्थिति सामने आएगी, बल्कि आम लोगों का प्रशासनिक व्यवस्था पर विश्वास भी मजबूत होगा। प्रशासनिक निर्णयों की निष्पक्षता और पारदर्शिता ही ऐसे विवादों का सबसे प्रभावी समाधान मानी जाती है। डिस्क्लेमर : यह समाचार संबंधित पक्ष द्वारा जिलाधिकारी को दिए गए प्रार्थना पत्र एवं उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। समाचार में वर्णित आरोप एवं दावे याचिकाकर्ता के कथन हैं। “खबर की तहतक” इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता। मामले की वास्तविक स्थिति सक्षम प्रशासनिक एवं राजस्व अधिकारियों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। यदि संबंधित पक्ष या प्रशासन अपना पक्ष प्रस्तुत करना चाहता है, तो उसे प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। Flow us on YouTube channel 👇 Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Like this:Like Loading… Related Post navigation नाबालिग लड़कियों की कथित तस्करी का खुलासा: यूपी से राजस्थान तक फैले नेटवर्क की जांच तेज थाना आलापुर पुलिस ने पॉक्सो एक्ट के वांछित आरोपी को किया गिरफ्तार