खबर की तहतक ✍️ जलालपुर/अम्बेडकरनगर। नमामि गंगे परियोजना के अंतर्गत पौराणिक महत्व की तमसा नदी के पुनरोद्धार को लेकर दिल्ली से आई अधिकारियों की टीम ने नदी का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान टीम ने नदी में गिरने वाले प्रमुख नालों तथा प्रदूषण के स्रोतों का जायजा लिया। निरीक्षण में पाया गया कि ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व रखने वाली तमसा नदी वर्तमान में गंभीर प्रदूषण और जलसंकट की समस्या से जूझ रही है। कई स्थानों पर नदी की जलधारा अत्यंत क्षीण पाई गई, जबकि प्राकृतिक जलस्रोत लगभग समाप्ति की स्थिति में हैं। टीम ने नदी की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए आवश्यक बिंदुओं को संज्ञान में लिया तथा आगे ठोस कार्ययोजना तैयार करने के संकेत दिए। निरीक्षण उपरांत टीम वापस रवाना हो गई। निरीक्षण दल में दिल्ली से कीर्ति वर्मा और सतीश महावत, जिला पर्यावरण अधिकारी सत्यम श्रीवास्तव, पर्यावरण समिति सदस्य केशव प्रसाद श्रीवास्तव तथा नगर निकाय के अधिशासी अधिकारी अरविंद कुमार शामिल रहे। स्थानीय जानकारों के अनुसार रामायण काल से जुड़ी आस्था के केंद्र माने जाने वाले श्रवण क्षेत्र एवं दुर्वाशा आश्रम जैसे धार्मिक स्थल तथा अकबरपुर और जलालपुर जैसे प्रमुख कस्बे तमसा नदी के किनारे बसे हैं। इन क्षेत्रों से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में कूड़ा-करकट नदी तटों पर डाला जाता है। इसके अतिरिक्त दोनों कस्बों के सैकड़ों नाले सीधे नदी में गिर रहे हैं। बताया गया कि क्षेत्र में संचालित पावरलूम उद्योगों में धागों की रंगाई एवं धुलाई के बाद निकलने वाले रासायनिक अपशिष्ट भी बिना उपचार के नदी में छोड़े जा रहे हैं, जिससे जल प्रदूषण की स्थिति और गंभीर होती जा रही है। पिछले वर्षों में नदी में मछलियों के मरने की घटनाएं भी सामने आती रही हैं, जो पर्यावरणीय असंतुलन का संकेत हैं। तमसा संरक्षण के लिए सक्रिय संस्था तमसा श्रेष्ठ ट्रस्ट के अध्यक्ष केशव प्रसाद श्रीवास्तव ने बताया कि ट्रस्ट द्वारा नदी संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार एवं स्थानीय प्रशासन के सहयोग से शीघ्र ही प्रभावी कदम उठाए जाएंगे, जिससे इस ऐतिहासिक धरोहर को पुनः जीवन मिल सके। (खबर की तहतक – सत्य के साथ) Post Views: 121 Post navigation मिशन शक्ति अभियान 5.0 के तहत दो गुमशुदा बालक सकुशल बरामद, परिजनों को सौंपा