खबर की तहतक ✍️ लखनऊ। हाईकोर्ट लखनऊ ने किसानों की निजी भूमि पर कथित जबरन निर्माण के मामले में राज्य सरकार से कड़ा जवाब मांगा है। अदालत ने स्पष्ट निर्देश देते हुए पूछा है कि उसके पूर्व आदेश का पालन किया गया है या नहीं। मामला ग्रामसभा गौराकमाल, लारपुर दक्षिण गांव से जुड़ा है, जहां किसानों ने आरोप लगाया कि राजस्व अभिलेखों में 8 फीट 3 इंच चौड़ा दर्ज चकमार्ग को तत्कालीन प्रधान द्वारा 16 फीट चौड़ा चकमार्ग बनवा दिया गया। इतना ही नहीं, किसानों का यह भी आरोप है कि उसी चकमार्ग पर 3 फीट चौड़े नाले का निर्माण जबरन कराया जा रहा है, जबकि राजस्व भूलेख और नक्शों में कहीं भी नाले का कोई उल्लेख नहीं है। किसानों का कहना है कि इस प्रक्रिया में उनकी निजी भूमि पर जबरदस्ती कब्जा कर निर्माण कार्य कराया जा रहा है, जो पूरी तरह नियमविरुद्ध है और किसानों के साथ खुली ज्यादती है। इस मामले में किसानों की ओर से हाईकोर्ट में अधिवक्ता रविन्द्र पाण्डेय ने मजबूत पक्ष रखते हुए अदालत के समक्ष मौके की मौजूदा स्थिति से जुड़े वीडियो और फोटो साक्ष्य प्रस्तुत किए। साक्ष्यों को देखने के बाद अदालत का रुख सख्त हो गया। न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ एवं न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने राज्य सरकार के अधिवक्ता को निर्देश दिया कि वह यह स्पष्ट करे कि 25 सितंबर 2025 को इसी न्यायालय द्वारा पारित आदेश का वास्तविक रूप से पालन किया गया है या नहीं। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे 10 मार्च 2026 को पुनः सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है और स्पष्ट किया है कि यह मामला उस दिन शीर्ष 10 मामलों (टॉप टेन) में रखा जाएगा। कोर्ट के इस आदेश के बाद अब निगाहें राज्य सरकार के जवाब पर टिकी हैं। यदि आदेश का पालन नहीं पाया गया, तो आने वाली सुनवाई में सरकार के खिलाफ और सख्त रुख अपनाया जा सकता है। Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Like this:Like Loading… Related Post navigation किछौछा दरगाह में डीआईजी व एसपी ने किया पैदल गश्त, त्योहारों को लेकर सुरक्षा व्यवस्था का लिया जायजा वारंटी अभियुक्तों पर पुलिस का शिकंजा: कोतवाली टाण्डा पुलिस ने दो आरोपियों को किया गिरफ्तार