उत्तर प्रदेश में 5 साल पुराने मुकदमों की होगी जांच, तहसील-कलेक्ट्रेट में विशेष अभियान

खबर की तहतक (वेब पोर्टल) – विशेष रिपोर्ट

लखनऊ।

प्रदेश की तहसील और कलेक्ट्रेट कार्यालयों में लंबित मामलों के निस्तारण को लेकर शासन ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्य सचिव एस.पी. गोयल के निर्देश पर अब पांच वर्ष से अधिक समय से लंबित मुकदमों की विशेष जांच कराई जाएगी। इसके लिए फरवरी माह में प्रदेशभर में विशेष निरीक्षण अभियान चलाया जाएगा।

निर्देश के अनुसार मंडलायुक्त और जिलाधिकारी स्वयं कार्यालयों में बैठकर फाइलों की समीक्षा करेंगे तथा व्यवस्थाओं का निरीक्षण करेंगे। निरीक्षण की रिपोर्ट सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजी जाएगी।

बताया जा रहा है कि इसी क्रम में मंडल स्तर पर अधिकारी तहसीलों और कलेक्ट्रेटों का औचक निरीक्षण करेंगे। निरीक्षण के दौरान पांच वर्ष से अधिक समय से लंबित मामलों के कारणों की जांच के साथ-साथ सबसे पुराने तीन मुकदमों की पत्रावली की वर्तमान स्थिति भी देखी जाएगी।

राजस्व मामलों पर रहेगा विशेष फोकस

अभियान के दौरान राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों, धारा-24 (भूमि पैमाइश) और वरासत से जुड़े प्रकरणों की डिजिटल फीडिंग की स्थिति की जांच की जाएगी। आम जनता से सीधे जुड़े मामलों के त्वरित निस्तारण पर विशेष जोर दिया गया है।

रिकॉर्ड रूम और नजारत पटल भी जांच के दायरे में

तहसीलों के रिकॉर्ड रूम (आरके ऑफिस) और नजारत पटल की कार्यप्रणाली की भी समीक्षा होगी। निर्विवाद वरासत मामलों को समय से ऑनलाइन दर्ज करने, खतौनी संशोधन की प्रक्रिया तथा लेखपालों को समय से पर्ची उपलब्ध कराने की व्यवस्था को परखा जाएगा। इसके साथ ही तालाब, पोखर, चकरोड और श्मशान जैसी सार्वजनिक जमीनों से अवैध कब्जे हटाने की प्रगति भी जांची जाएगी।

जनसुनवाई की शिकायतों का होगा सत्यापन

आईजीआरएस पोर्टल पर दर्ज शिकायतों के निस्तारण की गुणवत्ता पर भी निगरानी रखी जाएगी। जिलाधिकारी स्तर से शिकायतकर्ताओं से संपर्क कर वास्तविक स्थिति का सत्यापन कराया जाएगा। जाति, आय और निवास प्रमाण पत्र जारी करने में अनावश्यक देरी करने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

निरीक्षण की आहट से बढ़ी सक्रियता

शासन के सख्त निर्देशों के बाद तहसील और कलेक्ट्रेट कार्यालयों में फाइलों के निस्तारण की प्रक्रिया तेज हो गई है। संभावना जताई जा रही है कि मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत सहित वरिष्ठ अधिकारी कभी भी निरीक्षण कर सकते हैं, जिसके चलते प्रशासनिक अमला व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने में जुट गया है।

प्रशासन का मानना है कि इस विशेष अभियान से लंबित मामलों के त्वरित निस्तारण के साथ ही राजस्व व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।

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