खबर की तहतक ✍️ कहते हैं मेहनत कभी बेकार नहीं जाती—बस कभी-कभी उसे समय लगता है। यह कहावत सौम्या मिश्रा की सफलता में पूरी तरह साकार होती दिखती है। तीन असफल प्रयासों के बावजूद हार न मानने वाली सौम्या ने चौथे प्रयास में देश की सबसे कठिन परीक्षा मानी जाने वाली संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) में ऑल इंडिया रैंक 18 हासिल कर अपने सपने को हकीकत में बदला। छोटे शहर से बड़े सपनों तक का सफर उत्तर प्रदेश के उन्नाव से ताल्लुक रखने वाली सौम्या की शुरुआती पढ़ाई से लेकर उच्च शिक्षा तक की यात्रा दिल्ली में पूरी हुई। उनके पिता राघवेंद्र मिश्रा हिंदी के प्रोफेसर हैं, जबकि मां रेनू मिश्रा गृहिणी हैं। अनुशासन और शिक्षा को प्राथमिकता देने वाले पारिवारिक माहौल ने सौम्या को हर मुश्किल में संबल दिया। पहले PCS, फिर UPSC UPSC में चयन से पहले सौम्या ने PCS 2021 में शानदार प्रदर्शन करते हुए दूसरी रैंक हासिल की थी। इसके बाद उन्हें उपजिलाधिकारी (SDM) के रूप में मिर्जापुर जिले के मड़िहान क्षेत्र में तैनाती मिली। प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ तैयारी करना आसान नहीं था, लेकिन यही व्यावहारिक अनुभव आगे चलकर उनके उत्तर लेखन और दृष्टिकोण को और मजबूत करता गया। तीन असफलताएं, चौथी बार ऐतिहासिक सफलता UPSC की राह उनके लिए सीधी नहीं रही। पहले तीन प्रयासों में कभी प्रारंभिक परीक्षा तो कभी साक्षात्कार चरण बाधा बना। लेकिन हर असफलता को उन्होंने सीख में बदला। चौथे प्रयास में AIR-18 हासिल कर उन्होंने यह साबित कर दिया कि धैर्य, आत्ममंथन और निरंतर प्रयास से मंज़िल जरूर मिलती है। ड्यूटी के साथ तैयारी, मिला सही मार्गदर्शन तैयारी के दौरान तत्कालीन जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन से मिले मार्गदर्शन ने सौम्या को बड़ा संबल दिया। प्रशासनिक कार्यों के बेहतर प्रबंधन और समय देने से उन्हें पढ़ाई पर फोकस करने का अवसर मिला, जो उनकी सफलता में निर्णायक साबित हुआ। हर अभ्यर्थी का रास्ता अलग सौम्या मिश्रा की कहानी यह बताती है कि UPSC में सफलता का कोई एक फार्मूला नहीं होता। किसी को पहली बार में मंज़िल मिलती है, तो किसी को कई बार गिरकर उठना पड़ता है। सौम्या ने असफलता को “रुकावट” नहीं, बल्कि “सुधार का अवसर” माना—और यही सोच उन्हें IAS तक ले गई। अभ्यर्थियों के लिए संदेश एक इंटरव्यू में सौम्या ने कहा कि असफलता के बाद सबसे बड़ी गलती है निराश होकर रुक जाना। हर प्रयास के बाद अपनी कमियों का विश्लेषण करें, रणनीति में सुधार करें और सकारात्मक बने रहें। UPSC सिर्फ ज्ञान नहीं, बल्कि धैर्य, मानसिक मजबूती और निरंतरता की भी परीक्षा है। सौम्या मिश्रा की यह यात्रा उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो बार-बार प्रयास कर रहे हैं और अब भी अपने सपने को थामे हुए हैं—क्योंकि मंज़िल उन्हीं को मिलती है, जो हार मानना नहीं जानते। Post navigation श्रद्धा का सैलाब: शीतला माता मंदिर में उमड़े भक्त, भव्य आरती और शिव–पार्वती विवाह ने बांधा समां छापेमारी से लौट रही पुलिस टीम की स्कॉर्पियो पेड़ से टकराई, दारोगा की मौत, 4 पुलिसकर्मी घायल