खबर की तहतक ✍️ लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा में शुक्रवार को उस समय माहौल हल्का हो गया, जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी के शासनकाल पर तंज कसते हुए एक पुराना किस्सा साझा किया। मुख्यमंत्री का यह बयान सुनते ही सदन ठहाकों से गूंज उठा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सपा सरकार के दौरान क्रांतिकारी पंडित राम प्रसाद बिस्मिल के शहादत दिवस पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसमें शिक्षा विभाग के एक मंत्री को मुख्य अतिथि बनाया गया था। उन्होंने दावा किया कि जब उस मंत्री को बताया गया कि कार्यक्रम राम प्रसाद बिस्मिल के शहादत दिवस से जुड़ा है, तो उन्होंने सवाल कर दिया— “बिस्मिल्लाह खां को तो अभी कोई पुरस्कार मिला था, उन्हें फांसी क्यों दे दी गई?” शिक्षा व्यवस्था पर भी कसा तंज मुख्यमंत्री ने इस किस्से के जरिए तत्कालीन सरकार की कार्यशैली और शिक्षा व्यवस्था पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि उस दौर में जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों को देश के महान स्वतंत्रता सेनानियों और सांस्कृतिक विभूतियों के बीच तक का अंतर नहीं पता था। उन्होंने संकेतों में कहा कि उस्ताद बिस्मिल्लाह खां और पंडित राम प्रसाद बिस्मिल जैसे व्यक्तित्वों को लेकर ऐसी भ्रांतियां शासन की गंभीरता पर सवाल खड़े करती हैं। सदन में गूंजे ठहाके मुख्यमंत्री द्वारा यह किस्सा सुनाए जाने के बाद सत्ता पक्ष के साथ-साथ विपक्ष के कुछ सदस्यों के चेहरे पर भी मुस्कान दिखाई दी और सदन में जोरदार ठहाके लगे। कुछ देर के लिए विधानसभा का माहौल पूरी तरह हल्का हो गया। मुख्यमंत्री का यह बयान राजनीतिक हलकों में भी चर्चा का विषय बना हुआ है और इसे सपा शासनकाल पर एक तीखे व्यंग्य के तौर पर देखा जा रहा है। Post navigation शादी का झांसा देकर शारीरिक शोषण व आपत्तिजनक वीडियो वायरल करने की धमकी देने वाला आरोपी गिरफ्तार गलत जांच रिपोर्ट लगाने वालों पर होगी FIR, सीएम योगी का सख्त निर्देश