खबर की तहतक ✍️ | प्रयागराज इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद से जुड़े एक अहम मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है कि पति के चरित्र पर बिना ठोस सबूत अवैध संबंधों का आरोप लगाना न केवल क्रूरता है, बल्कि यह उसकी सामाजिक और मानसिक हत्या के बराबर है। कोर्ट ने इस तरह के आरोपों को वैवाहिक जीवन के लिए घातक बताया। न्यायमूर्ति नीरज तिवारी और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने पति की ओर से दायर तलाक की याचिका को स्वीकार करते हुए यह टिप्पणी की। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि पति ने लंबे समय तक किसी प्रकार की शिकायत नहीं की, तो इसका यह अर्थ नहीं लगाया जा सकता कि वह मानसिक प्रताड़ना का शिकार नहीं हुआ। खंडपीठ ने कहा कि बिना प्रमाण किसी व्यक्ति के चरित्र पर प्रश्नचिह्न लगाना उसके सामाजिक सम्मान को ठेस पहुंचाता है, जिससे मानसिक तनाव और अपमान की स्थिति उत्पन्न होती है। ऐसे आरोप पति की प्रतिष्ठा, आत्मसम्मान और सामाजिक छवि को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं, जिसे कानून की नजर में क्रूरता माना जाएगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि वैवाहिक जीवन में विश्वास सबसे महत्वपूर्ण आधार होता है और झूठे व निराधार आरोप इस विश्वास को पूरी तरह समाप्त कर देते हैं। ऐसे मामलों में पति या पत्नी को केवल इसलिए साथ रहने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता क्योंकि उन्होंने पहले शिकायत नहीं की थी। इस फैसले को वैवाहिक कानून से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण नज़ीर माना जा रहा है, जिससे यह स्पष्ट संदेश जाता है कि चरित्र हनन जैसे आरोपों को हल्के में नहीं लिया जाएगा और कानून ऐसे कृत्यों को सख्ती से देखेगा। Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Like this:Like Loading… Related Post navigation यूपी में छ: की मौत: पलभर में उजड़ गईं खुशियां, रह गया दर्द का समुंदर राजेसुल्तानपुर पुलिस ने अवैध पिस्टल के साथ युवक को किया गिरफ्तार, आर्म्स एक्ट में मुकदमा दर्ज