खबर की तहतक ✍️| लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति को और सख्ती से लागू करते हुए बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। मानव संपदा पोर्टल पर अपनी चल-अचल संपत्ति का विवरण अपलोड नहीं करने वाले 68,236 राज्यकर्मियों का वेतन रोक दिया गया है। शासन ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक संबंधित कर्मचारी अपनी संपत्ति का ब्योरा ऑनलाइन दर्ज नहीं करेंगे, तब तक उनका वेतन जारी नहीं किया जाएगा। पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई सरकारी तंत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है। राज्य सरकार पहले ही सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर संपत्ति विवरण मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दे चुकी थी, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने नियमों का पालन नहीं किया। कई विभागों के कर्मचारी प्रभावित बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई विभिन्न विभागों में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों पर लागू हुई है। शासन स्तर पर नियमित समीक्षा के दौरान यह सामने आया कि हजारों कर्मचारियों ने अब तक संपत्ति विवरण अपडेट नहीं किया है, जिसके बाद वेतन रोकने का निर्णय लिया गया। संपत्ति विवरण देने पर बहाल होगा वेतन शासन ने साफ किया है कि जिन कर्मचारियों का वेतन रोका गया है, वे मानव संपदा पोर्टल पर अपनी चल-अचल संपत्ति का पूरा विवरण अपलोड करते ही वेतन बहाली की प्रक्रिया में शामिल हो जाएंगे। इसके लिए अलग से किसी आदेश की आवश्यकता नहीं होगी। भ्रष्टाचार पर सख्त संदेश योगी सरकार के इस कदम को भ्रष्टाचार के विरुद्ध कड़ा संदेश माना जा रहा है। प्रशासनिक विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई से सरकारी कर्मचारियों में नियमों के पालन और पारदर्शिता को लेकर गंभीरता बढ़ेगी। — खबर की तहतक Post Views: 255 Post navigation रविदास जयंती जुलूस की सुरक्षा व्यवस्था का एसपी ने किया निरीक्षण बसखारी पुलिस की बड़ी कार्रवाई: पाक्सो एक्ट से संबंधित अभियुक्त गिरफ्तार