खबर की तहतक ✍️| लखनऊ। उत्तर प्रदेश सहित देशभर में स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर उठ रहे सवालों, बढ़ती शिकायतों और उपभोक्ताओं के विरोध को देखते हुए केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने बड़ा फैसला लिया है। मंत्रालय ने सभी बिजली वितरण कंपनियों को निर्देश जारी कर 9 फरवरी से 23 फरवरी तक “स्मार्ट मीटर पखवाड़ा” अनिवार्य रूप से आयोजित करने को कहा है। इस अभियान के तहत बिजली विभाग की टीमें घर-घर जाकर उपभोक्ताओं से सीधे संवाद करेंगी और मीटर से जुड़ी जानकारियां एकत्र करेंगी। सेंट्रल एडवाइजरी कमेटी के सदस्य एवं उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि उत्तर प्रदेश में अब तक 61 लाख 64 हजार 908 स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा चुके हैं, जिनमें से करीब 47 लाख 43 हजार 499 मीटर प्रीपेड मोड में कार्यरत हैं। इसके अलावा प्रदेश में 3,92,411 चेक मीटर भी लगाए गए हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इनकी मिलान रिपोर्ट अब तक भारत सरकार को नहीं भेजी गई है। इस विषय को लेकर उपभोक्ता परिषद लगातार भारत सरकार और रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (REC) से शिकायत करता आ रहा है। परिषद अध्यक्ष ने यह भी बताया कि प्रदेश में 8 लाख से अधिक उपभोक्ता ऐसे हैं जो अपने स्मार्ट प्रीपेड मीटर का बैलेंस तक नहीं देख पा रहे हैं। इसके साथ ही अधिक बिल आने, मीटर के तेज चलने और तकनीकी खामियों से जुड़े कई गंभीर मामले सामने आए हैं। कुछ जरूरी तकनीकी मानकों की अनदेखी करने पर एक नामी मीटर निर्माता कंपनी को नोटिस भी जारी किया जा चुका है। ऊर्जा मंत्रालय के निर्देशानुसार “स्मार्ट मीटर पखवाड़ा” के दौरान यह अनिवार्य किया गया है कि जिन उपभोक्ताओं के घर स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए गए हैं, वहां बिजली कंपनियों की टीमें प्रदर्शन सत्र (डेमो सेशन) आयोजित करेंगी। इन सत्रों में उपभोक्ताओं को मीटर के संचालन, बैलेंस जांच, रिचार्ज प्रक्रिया और शिकायत दर्ज कराने की पूरी जानकारी दी जाएगी। साथ ही उपभोक्ताओं की समस्याएं सुनकर उनका फीडबैक लेना भी अनिवार्य होगा। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद 15 दिनों के भीतर सभी राज्यों को समेकित रिपोर्ट भारत सरकार को भेजनी होगी। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे इस दौरान अपनी सभी शिकायतें लिखित रूप में अवश्य दर्ज कराएं, ताकि समस्याओं का समाधान समयबद्ध तरीके से किया जा सके। स्मार्ट मीटर पखवाड़ा के जरिए सरकार का उद्देश्य उपभोक्ताओं की आशंकाओं को दूर करना, पारदर्शिता बढ़ाना और बिजली व्यवस्था में सुधार लाना है। अब देखना यह होगा कि यह अभियान जमीनी स्तर पर उपभोक्ताओं को कितनी राहत दिला पाता है। — खबर की तहतक Post Views: 156 Post navigation अंबेडकर नगर: निजी खतौनी भूमि से जबरन रास्ता निकलवाने का आरोप, किसान ने जिलाधिकारी से लगाई गुहार राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के तहत टांडा में हेलमेट वितरण कार्यक्रम, डीएम–एसपी ने किया जागरूक