खबर की तहतक | डिफेंस डेस्क नई दिल्ली | Updated: 12 जनवरी 2026 कल्पना कीजिए समंदर के सीने पर तैरते ऐसे विशाल युद्धक किले की, जो एक इशारे पर दुनिया के किसी भी कोने में सैन्य शक्ति का प्रदर्शन कर सकता है। यह कोई कल्पना नहीं, बल्कि अमेरिकी नौसेना का गेराल्ड आर. फोर्ड क्लास एयरक्राफ्ट कैरियर है—दुनिया का सबसे महंगा, सबसे उन्नत और सबसे शक्तिशाली विमानवाहक पोत। जब यह करीब 1 लाख टन वजनी दैत्य समुद्री लहरों को चीरता हुआ आगे बढ़ता है, तो विरोधी देशों के रडार और सैटेलाइट्स की निगाहें इसी पर टिक जाती हैं। 1 लाख करोड़ का युद्धपोत, 25 साल तक ‘नो फ्यूल’ फोर्ड क्लास कैरियर की सबसे बड़ी खासियत इसका परमाणु ऊर्जा आधारित ढांचा है। इसमें लगे दो A1B न्यूक्लियर रिएक्टर इसे करीब 25 साल तक बिना ईंधन भरे संचालन की क्षमता देते हैं। यानी यह पोत लगभग असीमित दूरी तक समुद्र में सक्रिय रह सकता है। यही वजह है कि इसे समंदर का ‘अजेय किला’ कहा जाता है। EMALS: लॉन्च सिस्टम में क्रांति फोर्ड क्लास अपने पूर्ववर्ती निमित्ज़ क्लास से कई मायनों में आगे है। इसमें पारंपरिक स्टीम कैटापुल्ट की जगह EMALS (Electromagnetic Aircraft Launch System) लगाया गया है। इस तकनीक से: भारी लड़ाकू विमानों के साथ-साथ हल्के ड्रोन भी आसानी से लॉन्च किए जा सकते हैं विमानों पर कम दबाव पड़ता है, जिससे उनकी उम्र बढ़ती है लॉन्च प्रक्रिया तेज और अधिक सटीक हो जाती है मारक क्षमता और एयर विंग यह विमानवाहक पोत: 75 से अधिक लड़ाकू विमान ढो सकता है एक दिन में 160 से 220 सॉर्टीज़ (उड़ानें) संचालित करने में सक्षम है इसमें F-35C स्टेल्थ फाइटर और F/A-18E/F सुपर हॉर्नेट जैसे अत्याधुनिक विमान तैनात रहते हैं स्मार्ट टेक्नोलॉजी, कम स्टाफ फोर्ड क्लास में उन्नत ऑटोमेशन सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है। इसके चलते: निमित्ज़ क्लास की तुलना में 700 से 1000 कम नौसैनिकों की जरूरत पड़ती है परिचालन और रखरखाव लागत में भारी कमी आती है दुश्मन पर पैनी नजर: डुअल बैंड रडार इस कैरियर में लगी डुअल बैंड रडार (DBR) प्रणाली दुश्मन की मिसाइलों और विमानों को बहुत दूर से ही ट्रैक कर लेती है। इसकी सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम और लेजर आधारित हथियार भी तैनात हैं, जो इसे लगभग अभेद्य बनाते हैं। लागत और अमेरिकी वर्चस्व फोर्ड क्लास को दुनिया का सबसे महंगा सैन्य प्रोजेक्ट माना जाता है। पहले जहाज USS Gerald R. Ford (CVN-78) की लागत: करीब 13.3 बिलियन डॉलर (लगभग 1.1 लाख करोड़ रुपये) रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर अतिरिक्त 5 बिलियन डॉलर खर्च फिलहाल यह तकनीक और क्षमता केवल अमेरिका के पास है। यही कारण है कि यह विमानवाहक पोत चीन और रूस जैसे देशों के लिए समंदर में सबसे बड़ी रणनीतिक चुनौती माना जाता है। शक्ति का प्रतीक गेराल्ड आर. फोर्ड क्लास सिर्फ एक जहाज नहीं, बल्कि अमेरिकी सैन्य वर्चस्व का प्रतीक है। इसकी मौजूदगी ही किसी भी समुद्री क्षेत्र में ताकत का संतुलन बदलने के लिए काफी मानी जाती है। समंदर में तैनात यह महाबली आने वाले दशकों तक वैश्विक सुरक्षा राजनीति की दिशा तय करता रहेगा। हालांकि यह खबर एक विशेष सर्वे के आधार पर लिखी गई है इसकी पुष्टि वेब पोर्टल खबर की तहतक नहीं करता है । Post Views: 119 Post navigation ग्रामीणों को मिली बड़ी सुविधा, हर ग्राम पंचायत तक पहुंचेगी रोडवेज बस; डग्गेमार बसें भी होंगी अनुबंधित भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी का अंबेडकर नगर के कार्यकर्ताओं द्वारा भव्य स्वागत