खबर की तहतक ✍️ नागपुर। नागपुर की एक शांत गली शनिवार को गहरे शोक में डूब गई, जब भारतीय वायुसेना के 28 वर्षीय फ्लाइट लेफ्टिनेंट पूर्वेश दुरगकर का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटकर उनके घर पहुंचा। जैसे ही सेना का वाहन घर के सामने रुका और बेटे की पार्थिव देह बाहर लाई गई, मां की चीख से पूरा माहौल गमगीन हो उठा। वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। बताया जा रहा है कि असम में हुए सुखोई Su-30MKI फाइटर जेट हादसे में फ्लाइट लेफ्टिनेंट पूर्वेश दुरगकर की दर्दनाक मौत हो गई थी। हादसे की खबर मिलते ही परिवार और पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई थी। शनिवार को जब उनका पार्थिव शरीर नागपुर लाया गया, तो सैकड़ों लोगों की भीड़ उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए उमड़ पड़ी। मां अपने बेटे के पार्थिव शरीर से लिपटकर बार-बार रोते हुए कह रही थीं, “मेरा बेटा अब इस दुनिया में नहीं रहा…।” यह दर्दनाक दृश्य देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें भर आईं। परिवार के लोग, रिश्तेदार और पड़ोसी सभी गम में डूबे नजर आए। बताया जाता है कि फ्लाइट लेफ्टिनेंट पूर्वेश दुरगकर बेहद होनहार और साहसी पायलट थे। उन्होंने हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। देश सेवा के लिए समर्पित इस युवा पायलट की शहादत ने पूरे शहर को गर्व और गम दोनों से भर दिया। भारतीय वायुसेना और प्रशासन की मौजूदगी में उन्हें पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। तिरंगे में लिपटे वीर सपूत को सलामी दी गई और “भारत माता की जय” तथा “अमर रहे” के नारों के बीच नम आंखों से लोगों ने उन्हें अंतिम विदाई दी। फ्लाइट लेफ्टिनेंट पूर्वेश दुरगकर की शहादत ने एक बार फिर यह याद दिला दिया कि देश की सुरक्षा के लिए हमारे जवान किस तरह अपने प्राणों की आहुति दे देते हैं। उनके जाने से जहां परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है, वहीं पूरा देश इस वीर सपूत को सलाम कर रहा है। Post navigation टांडा में दोहरी हत्या का सनसनीखेज खुलासा, मुख्य आरोपी पुलिस मुठभेड़ में गिरफ्तार सामाजिक स्वतंत्रता, समानता व बंधुत्व पर मंथन, लोकजन सोशलिस्ट पार्टी का भागीदारी सम्मेलन संपन्न