CTET परीक्षा ने बढ़ाया गुरुजनों का तनाव, सवाल देखकर छूटे पसीने; बाहर निकलते ही छलका दर्द

खबर की तहतक ✍️|

जौनपुर

जौनपुर में आयोजित केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (CTET) शनिवार को सरकारी स्कूलों में वर्षों से पढ़ा रहे अध्यापकों के लिए भी बड़ी चुनौती बनकर सामने आई। परीक्षा केंद्रों से बाहर निकलते समय कई गुरुजनों के चेहरे पर तनाव और थकान साफ नजर आई। कड़ाके की ठंड के बावजूद परीक्षा के दबाव में कई शिक्षकों के पसीने छूटते देखे गए।

पेपर देखकर बढ़ा मानसिक दबाव

CTET परीक्षा देकर बाहर आए अध्यापक अरविंद कुमार ने बताया कि इस बार का प्रश्नपत्र अपेक्षा से कहीं अधिक कठिन था। उनका कहना था कि सरकारी सेवा में होने के बावजूद पहले TET और अब CTET की अनिवार्यता ने मानसिक दबाव को काफी बढ़ा दिया है।

उन्होंने कहा कि प्रश्नों का स्तर ऊंचा था और कई सवाल ऐसे थे, जिनमें केवल रटंत ज्ञान से काम नहीं चल सकता था।

कॉन्सेप्ट आधारित सवालों ने किया परेशान

परीक्षा में शामिल अध्यापक श्यामलकांत ने बताया कि प्रश्नपत्र देखते ही यह साफ हो गया था कि इस बार परीक्षा पूरी तरह अवधारणा आधारित है।

उन्होंने कहा, “विकल्प इतने नजदीकी थे कि सही उत्तर चुनना बेहद कठिन हो गया। वर्षों का पढ़ाने का अनुभव होने के बावजूद खुद को परीक्षा में परखना आसान नहीं था।”

समय प्रबंधन बना सबसे बड़ी चुनौती

कुछ अध्यापकों ने बताया कि मौसम ठंडा था, लेकिन परीक्षा के दौरान समय की कमी के कारण तनाव बढ़ गया।

उनका कहना था कि कई सवालों पर सोचने में ज्यादा समय लग गया, जिससे कुछ प्रश्न अधूरे ही छूट गए। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए परीक्षा जरूरी है, लेकिन इसके लिए स्पष्ट परीक्षा पैटर्न और तैयारी संबंधी मार्गदर्शन भी उतना ही आवश्यक है।

परीक्षा केंद्रों के बाहर होती रही चर्चा

परीक्षा केंद्रों के बाहर अन्य अभ्यर्थियों और अध्यापकों के बीच भी इसी तरह की चर्चाएं होती रहीं। कई शिक्षकों का मानना है कि TET और CTET जैसी परीक्षाएं शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से लाई गई हैं, लेकिन पहले से सेवा में कार्यरत अध्यापकों के लिए यह अतिरिक्त तनाव का कारण बन रही हैं।

गुणवत्ता सुधार या बढ़ता दबाव?

CTET परीक्षा ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि शिक्षक गुणवत्ता सुधार के लिए ऐसी परीक्षाएं कितनी जरूरी हैं और पहले से कार्यरत अध्यापकों के लिए इन्हें किस तरह अधिक व्यावहारिक बनाया जा सकता है।

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