खबर की तहतक ✍️ लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अब अवकाश के दिनों में शिक्षकों को जबरन ड्यूटी पर बुलाना जिला विद्यालय निरीक्षकों (DIOS) के लिए भारी पड़ सकता है। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय के दिशा-निर्देशों की अनदेखी पर शासन ने कड़ा रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। जल्द ही इस संबंध में शासन स्तर से स्पष्ट आदेश जारी किए जाने की तैयारी है। संक्षेप में ठंड के चलते घोषित अवकाश के बावजूद शिक्षकों को बुलाने पर नाराज़गी DIOS द्वारा आदेशों की अनदेखी की शिकायतें शासन तक पहुँचीं अब अवकाश में ड्यूटी से पहले उच्च स्तर की अनुमति अनिवार्य हो सकती है पूरा मामला पिछले महीनों में भीषण ठंड को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा प्रदेश भर में स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया था। इसके बाद शासन स्तर से भी स्पष्ट आदेश जारी हुए थे। बावजूद इसके, कई जिलों में DIOS ने अवकाश के दिन भी शिक्षकों की उपस्थिति अनिवार्य कर दी। कई मामलों में तो शिक्षकों को बाद में सूचना देकर स्कूल बुलाया गया, जिससे शिक्षक संगठनों में भारी रोष देखने को मिला। इस संबंध में शिक्षा निदेशालय से लेकर शासन तक कई शिकायतें दर्ज कराई गईं। अब बदलेगा नियम शिक्षक संगठनों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए शासन ने माध्यमिक शिक्षा निदेशालय को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने को कहा था। हालांकि, इन निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं हो पाया। इसी को देखते हुए अब शासन स्तर से नया आदेश लाने की तैयारी है। प्रस्ताव है कि किसी भी शिक्षक को अवकाश के दिन ड्यूटी पर बुलाने से पहले संयुक्त शिक्षा निदेशक (JD) की अनुमति अनिवार्य की जाए। बिना ठोस कारण आदेश जारी करने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है। शिक्षक संघ की मांग उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के महामंत्री राजीव यादव ने कहा कि > “हम आवश्यकता पड़ने पर छुट्टियों में भी ड्यूटी देने को तैयार हैं, लेकिन उसके बदले हमें प्रतिकर अवकाश मिलना चाहिए। एक दिन की छुट्टी में ड्यूटी कराई जाती है तो एक दिन का प्रतिकर अवकाश अनिवार्य हो।” निष्कर्ष शासन के इस रुख से साफ है कि अब शिक्षकों के अधिकारों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि नया आदेश लागू होता है, तो अवकाश के दिनों में मनमानी पर रोक लगेगी और शिक्षकों को राहत मिलेगी। Post Views: 253 Post navigation अम्बेडकरनगर में 33 करोड़ से संवरेगीं 261 ग्रामीण सड़कें, जल्द शुरू होगा निर्माण कार्य स्कूल-विश्वविद्यालय और अस्पताल खोलना होगा आसान, न्यूनतम भूमि की अनिवार्यता खत्म करने की तैयारी