खबर की तहतक ✍️ अम्बेडकरनगर/नई दिल्ली। रोजगार की तलाश में सऊदी अरब गए अंबेडकरनगर सहित उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान के 161 भारतीय मजदूर इन दिनों गंभीर मानवीय संकट में फंसे हुए हैं। सऊदी अरब के अबहा शहर में कार्यरत इन मजदूरों को बीते तीन महीनों से न तो वेतन मिला है और न ही पर्याप्त भोजन। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि मजदूरों ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर भारत सरकार से सुरक्षित स्वदेश वापसी की गुहार लगाई है। इन 161 मजदूरों में अंबेडकरनगर जिले के 9 मजदूर भी शामिल हैं, जिनके परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। मजदूरों का आरोप है कि कंपनी न केवल उनका वेतन रोक कर बैठी है, बल्कि वीजा समाप्त होने के बावजूद जबरन काम भी कराया जा रहा है। अंबेडकरनगर के ये मजदूर फंसे जानकारी के अनुसार सऊदी अरब में फंसे अंबेडकरनगर के मजदूरों में- बसखारी ब्लॉक के अमिया बामनपुर गांव के संतोष कुमार और हृदेश कुमार, आलापुर क्षेत्र के फूलबदन (नैपुरा), जहांगीरगंज के अजय चौहान (जैती), विजय बहादुर (खुज्जीपुर), इल्तिफातगंज के वीरेंद्र कुमार (औरंगाबाद), दुर्गापुर करमपुर के विजयपाल, आलापुर के सुरेश (सहिजना हमजापुर) और अकबरपुर क्षेत्र के सूरजभान (बनगांव) शामिल हैं। वीजा खत्म, पासपोर्ट कंपनी के कब्जे में अमिया बामनपुर निवासी हृदेश कुमार के भतीजे सोनू राजभर ने बताया कि मजदूरों का वीजा छह महीने पहले ही समाप्त हो चुका है, इसके बावजूद कंपनी उन्हें वापस भारत नहीं भेज रही। आरोप है कि कंपनी ने मजदूरों के पासपोर्ट अपने पास जमा कर रखे हैं और पेंटिंग समेत अन्य काम जबरन कराया जा रहा है। स्थिति इतनी दयनीय है कि भारत में रह रहे परिजन, जो खुद आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं, अपने फंसे हुए परिजनों को खाने-पीने के लिए पैसे भेजने को मजबूर हैं। वीडियो वायरल, सरकार से हस्तक्षेप की मांग मजदूरों द्वारा जारी वीडियो सामने आने के बाद यह मामला तूल पकड़ने लगा है। कई सामाजिक संगठनों और कार्यकर्ताओं ने भारत सरकार के विदेश मंत्रालय और सऊदी अरब स्थित भारतीय दूतावास से संपर्क कर तत्काल मदद की मांग की है। बताया जा रहा है कि इस समूह में अंबेडकरनगर के अलावा गोरखपुर, संतकबीरनगर, लखनऊ, लखीमपुर, आजमगढ़ और बस्ती के मजदूर भी शामिल हैं। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल इधर भारत में मजदूरों के परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। हृदेश कुमार के पिता राममिलन ने बताया कि उनके बेटे के पास न तो पैसे हैं और न ही लौटने का साधन। घर में बुजुर्ग माता-पिता, पत्नी और 12 व 8 वर्ष के दो बच्चे बेसब्री से उसकी राह देख रहे हैं। वहीं संतोष कुमार के परिवार में माता-पिता, पत्नी और तीन छोटे बच्चे हैं, जिनका पूरा भरण-पोषण उसी पर निर्भर था। परिजनों का कहना है कि शुरुआत में एक-दो महीने तक मजदूरों ने पैसे भेजे, लेकिन इसके बाद हालात लगातार बिगड़ते चले गए। अब स्थिति यह है कि कमाई शून्य है और जीवन खतरे में। दूतावास और विदेश मंत्रालय को भेजी गई जानकारी सामाजिक कार्यकर्ता आबिद हुसैन (बजरंगी भाईजान) ने सऊदी अरब में फंसे मजदूरों से फोन पर बातचीत कर उनकी व्यथा सुनी। उन्होंने बताया कि इस पूरे मामले की विस्तृत जानकारी विदेश मंत्रालय और जेद्दा स्थित भारतीय दूतावास को भेज दी गई है और शीघ्र कार्रवाई की मांग की गई है। सुरक्षित स्वदेश वापसी की अपील मजदूरों और उनके परिजनों ने भारत सरकार से मांग की है कि मानवीय आधार पर तत्काल हस्तक्षेप कर सभी भारतीय मजदूरों को सुरक्षित स्वदेश लाया जाए। जब तक उनकी वापसी सुनिश्चित नहीं होती, तब तक इन परिवारों के लिए चिंता और पीड़ा का यह दौर खत्म होना मुश्किल नजर आ रहा है। Post Views: 165 Post navigation सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश: स्कूलों में छात्राओं को मुफ्त सैनिटरी पैड अनिवार्य, अलग शौचालय नहीं तो रद्द होगी मान्यता एनएचएआई के निर्देश पर कानपुर–बिठूर हाईवे पर सड़क सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित, 200 छात्रों ने ली सुरक्षा शपथ