खबर की तहतक राज्य ब्यूरो | लखनऊ उत्तर प्रदेश में पशु चिकित्साधिकारी के 404 पदों पर सीधी भर्ती में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षण शून्य किए जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस पर उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग राज्य आयोग ने कड़ी नाराजगी जताते हुए संबंधित विभाग से वर्ष 1994 के बाद की गई सभी सीधी भर्तियों, आरक्षण की स्थिति और रोस्टर रजिस्टर का विस्तृत विवरण तलब किया है। गुरुवार को इंदिरा भवन स्थित आयोग कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई के दौरान आयोग अध्यक्ष राजेश वर्मा ने कहा कि बिना स्पष्ट आधार के ओबीसी आरक्षण को शून्य करना न केवल संवैधानिक प्रावधानों के विपरीत है, बल्कि सामाजिक न्याय की भावना के भी खिलाफ है। आयोग ने इस प्रकरण को गंभीर मानते हुए अगली सुनवाई की तिथि 5 फरवरी 2026 तय की है। आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पशुपालन विभाग द्वारा वर्ष 1994 के बाद अब तक की गई सभी सीधी भर्तियों का ब्योरा, उनमें लागू आरक्षण की स्थिति और रोस्टर रजिस्टर की प्रमाणित प्रतियां अगली सुनवाई से पहले प्रस्तुत की जाएं। जनसुनवाई के दौरान आयोग के समक्ष अन्य मामलों पर भी विचार किया गया। इनमें सोनू कश्यप हत्याकांड और जगन्नाथ प्रसाद गंगवार से जुड़े भूखंड प्रकरण पर भी संबंधित अधिकारियों से जानकारी ली गई और आवश्यक निर्देश दिए गए। पिछड़ा वर्ग आयोग के इस सख्त रुख के बाद पशु चिकित्साधिकारी भर्ती प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं। माना जा रहा है कि आयोग की अगली सुनवाई में इस भर्ती को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय सामने आ सकता है। 👉 खबर की तह तक सटीक, संतुलित और सामाजिक न्याय के सवालों पर बेबाक पत्रकारिता Post navigation वह किसी और की होने जा रही थी…’ सगाई से नाराज़ प्रेमी ने युवती की हत्या की, आरोपी गिरफ्तार यूपी पंचायत चुनाव 2026: उल्टी गिनती शुरू, जिलों में पहुंचाए जा रहे मतपत्र; तैयारियां तेज