जिस पिता ने खेतों में पसीना बहाकर बच्चों के सपने सींचे, आज वही दुनिया छोड़ गए! एक बेटा शिक्षक, दूसरा PCS अधिकारी।

खबर की तहतक न्यूज नेटवर्क

20 दिनों से चल रहे थे बीमार, इलाज के दौरान ली अंतिम सांस; अपने पीछे छोड़ गए संघर्ष, संस्कार और सफलता की प्रेरणादायक विरासत

पवई (आजमगढ़)।

पवई थाना क्षेत्र के सौदमा गांव निवासी समाजसेवी राजित राम यादव का आगरा के एक अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। लगभग 70 से 72 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली। बताया जा रहा है कि वह पिछले करीब 20 दिनों से बीमार चल रहे थे। बेहतर उपचार के लिए उन्हें आगरा ले जाया गया था, जहां उपचार के दौरान उनका निधन हो गया। उनके निधन की खबर गांव पहुंचते ही परिवार सहित पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।

स्वर्गीय राजित राम यादव केवल एक समाजसेवी ही नहीं, बल्कि संघर्ष, मेहनत और पारिवारिक जिम्मेदारियों के प्रति समर्पण की मिसाल भी थे। सरल स्वभाव, उदार विचारों और मिलनसार व्यक्तित्व के धनी राजित राम यादव समाज के लोगों के बीच अपनी अलग पहचान रखते थे। उन्होंने अपने जीवन का महत्वपूर्ण समय सामाजिक कार्यों और लोगों के बीच बिताया।

खुद संघर्ष किया, बच्चों का भविष्य संवारा

स्वर्गीय राजित राम यादव के जीवन की सबसे प्रेरणादायक उपलब्धि उनके बच्चों की सफलता रही। बताया जाता है कि उन्होंने खेती-किसानी और कठोर परिश्रम के सहारे अपने परिवार का भरण-पोषण किया। आर्थिक और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने अपने बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता दी और अपना खून-पसीना बहाकर उन्हें बेहतर भविष्य देने का प्रयास किया।

उनकी तीन बेटियां और दो बेटे हैं। सभी बच्चों का घर बस चुका है। उनके बड़े बेटे रणविजय यादव इंटर कॉलेज में शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जबकि छोटे बेटे इंद्र विजय यादव उत्तर प्रदेश में पीसीएस अधिकारी के पद पर तैनात हैं।

एक पिता के लिए इससे बड़ी उपलब्धि क्या होगी कि जिस पिता ने खेतों में मेहनत करके अपने बच्चों के सपनों को सींचा, उसी के संस्कार और परिश्रम से एक बेटा शिक्षक बना और दूसरा प्रशासनिक सेवा में पहुंचा। यह सफलता स्वर्गीय राजित राम यादव के वर्षों के त्याग, तपस्या और अथक परिश्रम की कहानी बयां करती है।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

उनके निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार के सदस्य वीरेंद्र, रणविजय, इंद्र विजय और राम विजय सहित अन्य परिजन गहरे सदमे में हैं। गांव के लोग और शुभचिंतक उनके व्यक्तित्व, सामाजिक योगदान और संघर्षपूर्ण जीवन को याद कर श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं।

एक ऐसा व्यक्ति जिसने अपने जीवन में मेहनत को अपना धर्म बनाया, बच्चों के भविष्य को अपनी प्राथमिकता रखा और समाज के बीच अपनी पहचान बनाई, आज भले ही इस दुनिया में नहीं रहा, लेकिन उसके संघर्ष और संस्कारों की कहानी आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती रहेगी।

विशेष संवाददाता अनिल यादव की खास रिपोर्ट | आजमगढ़

खबर की तहतक | सच के साथ… सदैव आपके साथ

डिस्क्लेमर:

यह समाचार प्राप्त स्थानीय जानकारी एवं उपलब्ध विवरणों के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें उल्लिखित आयु, बीमारी, निधन और पारिवारिक विवरण की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित परिजनों एवं आधिकारिक स्रोतों से की जानी शेष हो सकती है। समाचार का उद्देश्य दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित करना एवं उनके जीवन संघर्ष और उपलब्धियों को पाठकों तक पहुंचाना है। किसी भी प्रकार की अपुष्ट या भ्रामक जानकारी प्रसारित करना हमारा उद्देश्य नहीं है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed

Call Now Button