जलालपुर में 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन बनी बेजुबान पशुओं के लिए काल! एक बकरे की मौत से परिवार पर टूटा दु:खों का पहाड़

खबर की तहतक न्यूज नेटवर्क

बड़े पुल के पास मिट्टी की ऊंचाई बढ़ने से जमीन के बेहद करीब पहुंची हाईटेंशन लाइन, पीड़ित महिला की बेबसी देख पसीज जाएगा दिल; मिट्टी भराई कराने वाले पक्ष और विद्युत विभाग की जिम्मेदारी को लेकर उठे सवाल

वेब पोर्टल खबर की तहतक | जलालपुर, अंबेडकरनगर।

किसी परिवार के लिए उसके मवेशी केवल पशु नहीं होते, बल्कि उसकी रोजमर्रा की जिंदगी, आजीविका और भावनाओं का भी हिस्सा होते हैं। उनकी देखभाल में वर्षों की मेहनत और अपनापन जुड़ा होता है। लेकिन जब आंखों के सामने बेजुबान पशु करंट की चपेट में आकर दम तोड़ दें और परिवार चाहकर भी उन्हें बचा न सके, तो उस पीड़ा को शब्दों में बयां करना आसान नहीं होता। जलालपुर नगर क्षेत्र के बड़े पुल के पास कुछ ऐसा ही दर्दनाक मामला सामने आया है, जहां 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन विद्युत लाइन की चपेट में आने से एक बकरे समेत अन्य मवेशियों की मौत होने की बात सामने आई है।

मामले की गंभीरता इस बात से समझी जा सकती है कि सड़क किनारे मिट्टी की भराई के बाद जमीन की ऊंचाई काफी बढ़ गई है। स्थानीय लोगों के अनुसार, यहां प्लाटिंग के उद्देश्य से मिट्टी डलवाकर उसकी भराई और पिटाई कराई गई है। इसी स्थान के बगल से पहले से 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन विद्युत लाइन गुजर रही है। मिट्टी की सतह ऊंची हो जाने के कारण अब यह बिजली का तार जमीन के बेहद करीब आ गया है। तार मिट्टी के नीचे दबा हुआ नहीं है, बल्कि बढ़ी हुई मिट्टी की सतह के बगल में खतरनाक स्थिति में मौजूद बताया जा रहा है और उसमें विद्युत आपूर्ति भी चालू है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब मवेशी मिट्टी पर कुछ खाने-पीने के लिए पहुंचते हैं तो इस हाईटेंशन लाइन के संपर्क में आने से करंट की चपेट में आ जाते हैं। इसी वजह से दो बकरियों समेत अन्य मवेशियों की जान जाने की बात कही जा रही है।

इस घटना का सबसे मार्मिक पहलू उस महिला का दर्द है, जिसने अपने बेजुबान पशुओं को खोया है। उपलब्ध वीडियो में महिला अपनी पीड़ा व्यक्त करती दिखाई देती है। उसकी बेबसी और दुख यह सोचने पर मजबूर कर देते हैं कि जिन पशुओं को परिवार के सदस्य की तरह पाला-पोसा गया हो, उन्हें इस तरह खोने का दर्द कितना गहरा होगा। पशुओं की मौत से परिवार को आर्थिक नुकसान तो हुआ ही है, साथ ही भावनात्मक आघात भी पहुंचा है।

आखिर इस खतरे की जिम्मेदारी किसकी?

इस घटना ने कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर सवाल यह है कि प्लाटिंग के लिए मिट्टी की भराई कराते समय क्या पहले से मौजूद 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन की स्थिति और उससे उत्पन्न होने वाले खतरे का आकलन किया गया था? क्या मिट्टी की ऊंचाई बढ़ाने से पहले विद्युत विभाग से समन्वय किया गया?

वहीं दूसरी ओर यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि जब मिट्टी की ऊंचाई बढ़ने से हाईटेंशन लाइन जमीन के बेहद करीब पहुंच गई, तो विद्युत सुरक्षा के लिहाज से आवश्यक कदम समय रहते क्यों नहीं उठाए गए? क्या संबंधित अधिकारियों को इस बदली हुई स्थिति की जानकारी थी? यदि नहीं, तो अब इस खतरे को दूर करने के लिए तत्काल क्या कदम उठाए जाएंगे?

यह किसी एक पक्ष पर आरोप लगाने का मामला नहीं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है। मिट्टी की भराई कराने वाले पक्ष और विद्युत लाइन की सुरक्षा से जुड़े जिम्मेदार विभाग—दोनों की भूमिका की निष्पक्ष जांच आवश्यक है, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

अधिकारियों को दिया शिकायती पत्र

पीड़ित पक्ष ने 3 नवंबर 2026 को उपखंड अधिकारी विद्युत, जलालपुर को शिकायती प्रार्थना पत्र देकर हाईटेंशन लाइन को सुरक्षित कराने और आवश्यक कार्रवाई की मांग की है। इसके अलावा जलालपुर कोतवाली में भी प्रार्थना पत्र देकर पूरे मामले से अवगत कराया गया है।

ग्रामीणों की मांग है कि संबंधित अधिकारी तत्काल मौके पर पहुंचकर स्थलीय निरीक्षण करें। मिट्टी की बढ़ी हुई ऊंचाई और 11 हजार वोल्ट की विद्युत लाइन के बीच की दूरी की तकनीकी जांच कराई जाए। साथ ही मवेशियों की मौत के मामले में निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी निर्धारित की जाए और पीड़ित परिवार को नियमानुसार उचित सहायता दिलाने पर भी विचार किया जाए।

बेजुबानों की मौत एक चेतावनी है, इसे नजरअंदाज न किया जाए।

आज इस घटना में बेजुबान पशुओं की जान गई है, लेकिन यदि समय रहते खतरे को दूर नहीं किया गया तो कल कोई राहगीर, बच्चा या अन्य व्यक्ति भी इसकी चपेट में आ सकता है। इसलिए यह मामला केवल दो बकरियों या कुछ मवेशियों की मौत का नहीं, बल्कि आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा का भी है।

प्रशासन और संबंधित विभागों को चाहिए कि एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालने के बजाय आपसी समन्वय से इस समस्या का समाधान करें। आखिर किसी बड़ी अनहोनी के बाद कार्रवाई करने से बेहतर है कि समय रहते खतरे को समाप्त कर दिया जाए।

खबर की तहतक का सवाल:

क्या जिम्मेदार पक्ष और संबंधित विभाग इस घटना से सबक लेकर हाईटेंशन लाइन को सुरक्षित कराने के साथ पीड़ित परिवार को न्याय और राहत दिलाने के लिए समय रहते ठोस कदम उठाएंगे?

खबर की तहतक | सच के साथ… सदैव आपके साथ।

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