खबर की तहतक वेब पोर्टल ✍️ गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची ने प्रशासन से लेकर आमजन तक को चौंका दिया है। 6 जनवरी को ड्राफ्ट सूची जारी होने के साथ ही दावे-आपत्तियों के लिए 6 जनवरी से 6 फरवरी तक का समय निर्धारित किया गया है। इसी दौरान सामने आए आंकड़ों में कई ऐसे मामले पाए गए हैं, जो गंभीर जांच की मांग कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, गोरखपुर के एक ही मकान नंबर पर 233 मतदाताओं के दर्ज होने का मामला सामने आया है। हैरानी की बात यह है कि इस एक पते पर हिंदू, मुस्लिम और सिख समुदाय के नाम एक साथ दर्ज हैं। मतदाता सूची में इतनी बड़ी संख्या का एक ही पते पर होना, सूची की शुद्धता और सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है। प्रशासन अलर्ट, जांच के निर्देश निर्वाचन से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि SIR अभियान का उद्देश्य मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाना है। ड्राफ्ट सूची में सामने आई अनियमितताओं को दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया के जरिए ठीक किया जाएगा। संबंधित बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) को ऐसे मामलों की मैदानी जांच के निर्देश दिए गए हैं, ताकि वास्तविक मतदाताओं की पहचान सुनिश्चित हो सके। नागरिकों से अपील प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपना नाम, पता, उम्र और अन्य विवरण सावधानीपूर्वक जांच लें। यदि किसी को डुप्लीकेट नाम, गलत पता, मृत या स्थानांतरित व्यक्ति का नाम सूची में दिखे, तो निर्धारित अवधि में आपत्ति दर्ज कराएं। क्यों अहम है SIR? विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत फर्जी, दोहरे और गलत प्रविष्टियों को हटाकर सूची को अद्यतन किया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रक्रिया से निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित होते हैं और मतदाता सूची की विश्वसनीयता बढ़ती है। कैसे करें दावा-आपत्ति? तारीख: 6 जनवरी से 6 फरवरी माध्यम: संबंधित बीएलओ/निर्वाचन कार्यालय/निर्धारित ऑनलाइन प्लेटफॉर्म दस्तावेज: पहचान और पते से संबंधित वैध प्रमाण गोरखपुर में सामने आया यह मामला बताता है कि SIR अभियान कितना जरूरी है। अब निगाहें इस पर हैं कि दावे-आपत्तियों के बाद अंतिम मतदाता सूची कितनी साफ-सुथरी और भरोसेमंद बनकर सामने आती है। Post Views: 141 Post navigation गौ-सेवा से सामाजिक एकता का संदेश: तमसा श्रेष्ठ ट्रस्ट ने मकर संक्रांति पर दिखाई मिसाल हर डॉग बाइट और हर मौत पर भारी जुर्माना लगेगा, सुप्रीम कोर्ट की राज्य सरकारों को सख्त चेतावनी