नोड्यूज़ के 9 साल बाद भी नहीं मिले मूल दस्तावेज! बैंक ऑफ बड़ौदा माडरमऊ शाखा पर परिवार ने लगाए टालमटोल के आरोप

खबर की तहतक

संवाददाता आलापुर- पंकज कुमार

आलापुर , अंबेडकरनगर

अम्बेडकरनगर जनपद के थाना जहांगीरगंज क्षेत्र स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा, माडरमऊ शाखा एक बार फिर विवादों में है। एक पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि ट्रेडर ऋण स्वाभिमान योजना के तहत लिया गया ऋण पूरी तरह चुकाने और 24 अक्टूबर 2017 को नो ड्यूज़ प्रमाणपत्र प्राप्त करने के बावजूद आज तक मकान, दुकान एवं अन्य संपत्ति के मूल दस्तावेज उन्हें वापस नहीं दिए गए।

पीड़ित परिवार के अनुसार, ग्राम मामपुर, तहसील आलापुर निवासी स्वर्गीय संतोष कुमार ने बैंक से ऋण लिया था। लंबी बीमारी के चलते वर्ष 2011 में उनका निधन हो गया। परिवार का आरोप है कि इसके बाद वर्ष 2013 में बैंक अधिकारियों के दबाव में ऋण की शेष राशि जमा कराई गई। बाद में बैंक द्वारा नो ड्यूज़ प्रमाणपत्र भी जारी कर दिया गया, लेकिन मूल दस्तावेज आज तक वापस नहीं किए गए।

परिजनों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से वे लगातार बैंक के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन हर बार उन्हें “सर्वर नहीं है”, “नेटवर्क नहीं है”, “बाद में आइए” या “कर्मचारी व्यस्त हैं” जैसे कारण बताकर लौटा दिया जाता है। उनका आरोप है कि इस लापरवाही के कारण उन्हें मानसिक, आर्थिक और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है तथा संपत्ति से जुड़े कई आवश्यक कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।

पीड़ित परिवार ने इस संबंध में मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी, क्षेत्रीय प्रबंधक एवं लीड बैंक मैनेजर (एलडीएम) को शिकायत भेजकर मूल दस्तावेज वापस दिलाने, मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय और विधिक कार्रवाई की मांग की है।

इस संबंध में पक्ष जानने के लिए खबर की तहतक द्वारा बैंक की शाखा के सीयूजी नंबर पर संपर्क किया गया। फोन बैंक के एक कर्मचारी ने रिसीव किया और बताया कि शाखा प्रबंधक रफत कमाल खान अवकाश पर हैं तथा उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है। शाखा प्रबंधक का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

डिस्क्लेमर

यह समाचार पीड़ित परिवार द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों, शिकायतों और उनके लगाए गए आरोपों पर आधारित है। खबर की तहतक स्वतंत्र रूप से इन आरोपों की पुष्टि नहीं करता है। संबंधित बैंक अथवा शाखा प्रबंधक का विस्तृत पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी यथावत प्रकाशित किया जाएगा। जांच या सक्षम प्राधिकारी के अंतिम निष्कर्ष के अनुसार तथ्य भिन्न हो सकते हैं।

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