खबर की तहतक ✍️ लखनऊ | उत्तर प्रदेश में बढ़ते बिजली संकट के बीच सरकार ने बड़ी सख्ती दिखाते हुए नई व्यवस्था लागू कर दी है। अब यदि कहीं ट्रांसफार्मर जलता है, तो उसकी जिम्मेदारी सीधे संबंधित अभियंताओं की मानी जाएगी और मरम्मत पर होने वाला खर्च भी उनसे वसूला जाएगा। क्या है नया नियम? प्रदेश के बिजली विभाग ने साफ कर दिया है कि: ट्रांसफार्मर फुंकने (जलने) की स्थिति में संबंधित अभियंता जिम्मेदार होंगे जले ट्रांसफार्मर की मरम्मत या बदलाव पर आने वाला खर्च अभियंता से वसूला जाएगा लापरवाही या समय पर मेंटेनेंस न करने पर कार्रवाई तय मानी जाएगी किसने जारी किए निर्देश? इस संबंध में डॉ आशीष गोयल (पावर कॉर्पोरेशन अध्यक्ष) ने सभी बिजली वितरण निगमों के प्रबंध निदेशकों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। क्यों लिया गया यह फैसला? प्रदेश में लगातार बढ़ रही बिजली मांग ओवरलोडिंग के कारण ट्रांसफार्मर जलने की घटनाएं समय पर मरम्मत और रखरखाव में लापरवाही उपभोक्ताओं को हो रही लंबी बिजली कटौती सरकार का मानना है कि जिम्मेदारी तय होने से सिस्टम में सुधार आएगा और फील्ड स्तर पर जवाबदेही बढ़ेगी। क्या होगा असर? बिजली विभाग के अभियंताओं में जवाबदेही बढ़ेगी ट्रांसफार्मर की समय-समय पर जांच और मेंटेनेंस पर जोर होगा ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बेहतर हो सकती है बार-बार ट्रांसफार्मर फुंकने की समस्या में कमी आने की उम्मीद उपभोक्ताओं के लिए राहत? इस फैसले से आम जनता को सबसे ज्यादा राहत मिलने की उम्मीद है। खासकर गर्मी के मौसम में ट्रांसफार्मर जलने से होने वाली लंबी बिजली कटौती पर लगाम लग सकती है। निष्कर्ष बिजली संकट से निपटने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार का यह कदम सख्त लेकिन जरूरी माना जा रहा है। अब लापरवाही पर सीधे आर्थिक जिम्मेदारी तय होने से बिजली व्यवस्था में सुधार की उम्मीद बढ़ गई है। तहतक न्यूज़ पोर्टल पर जुड़े रहें, हर बड़ी खबर के लिए Post navigation महाजंग के बीच दमदार कूटनीति: एक और LPG कार्गो शिप भारत पहुंचा, सप्लाई को मिली राहत Gaighat Incident: SSP से शिकायत की बात पर भड़के थानाध्यक्ष, फायरिंग में व्यक्ति की मौत; हत्या का केस दर्ज