नीचे से दौड़ेंगी गाड़ियां, ऊपर से गुजरेंगे जंगली जानवर  ,   जंगल के बीच बनेगा भारत का सबसे आधुनिक हाईवे, NHAI की अनोखी पहल

खबर की तहतक ✍️

नई दिल्ली।

भारत में सड़क और एक्सप्रेसवे निर्माण अब सिर्फ तेज रफ्तार और बेहतर कनेक्टिविटी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीव सुरक्षा को भी बराबर अहमियत दी जा रही है। इसी दिशा में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने चेन्नई-बेंगलुरु एक्सप्रेसवे पर एक अनोखी पहल की है, जहां जंगल के बीच वाइल्डलाइफ एनिमल ओवरपास का निर्माण किया जा रहा है।

यह खास ओवरपास तमिलनाडु के महिमांडलम रिजर्व फॉरेस्ट क्षेत्र में बनाया जाएगा, जिससे नीचे से वाहन निर्बाध रूप से गुजरेंगे और ऊपर से जंगली जानवर सुरक्षित तरीके से एक जंगल से दूसरे जंगल में आवाजाही कर सकेंगे।

क्या है वाइल्डलाइफ ओवरपास?

वाइल्डलाइफ ओवरपास एक विशेष रूप से डिजाइन किया गया पुल होता है, जिसे हाईवे के ऊपर इस तरह बनाया जाता है कि जंगली जानवर बिना किसी डर और बाधा के सड़क पार कर सकें। इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष कम होता है और सड़क दुर्घटनाओं की आशंका भी घटती है।

महिमांडलम रिजर्व फॉरेस्ट क्षेत्र भारतीय गौर, पैंथर, हिरण, जंगली सूअर सहित कई दुर्लभ और महत्वपूर्ण वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास है। ऐसे में इस क्षेत्र में ओवरपास का निर्माण वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

90 मीटर लंबा और 25 मीटर चौड़ा होगा ओवरपास

NHAI के अनुसार, यह वाइल्डलाइफ ओवरपास करीब 90 मीटर लंबा, 25 मीटर चौड़ा और सड़क से लगभग 5.5 मीटर ऊंचा होगा। इसका डिजाइन इस तरह तैयार किया गया है कि जानवरों को प्राकृतिक वातावरण का अनुभव मिले और वे बिना किसी तनाव के इसका उपयोग कर सकें।

जानवरों के लिए बनेगा आर्टिफिशियल घास का मैदान

ओवरपास को पूरी तरह प्राकृतिक रूप देने के लिए तमिलनाडु वन विभाग के सहयोग से इसके ऊपर आर्टिफिशियल घास का मैदान भी विकसित किया जाएगा। यह घास आसपास के जंगल के साथ कैमोफ्लाज का काम करेगी, जिससे जानवरों को यह संरचना किसी कृत्रिम ढांचे की तरह महसूस न हो।

विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण पर जोर

करीब 258 किलोमीटर लंबा चार-लेन चेन्नई-बेंगलुरु एक्सप्रेसवे देश के प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में शामिल है। इसकी आधारशिला मई 2022 में रखी गई थी। इस परियोजना के जरिए जहां दक्षिण भारत के प्रमुख शहरों के बीच यात्रा आसान और तेज होगी, वहीं पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण का भी संतुलन बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहल भविष्य में सड़क विकास परियोजनाओं के लिए एक मॉडल साबित हो सकती है, जहां विकास और प्रकृति साथ-साथ आगे बढ़ें।

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