अधिवक्ता गयादीन अहिरवार की हत्या से उबाल, अम्बेडकरनगर के अधिवक्ताओं ने भरी हुंकार; एक करोड़ मुआवजे की मांग

खबर की तहतक न्यूज नेटवर्क

 

रिपोर्ट- राकेश कुमार विश्वकर्मा (लीगल ऐडवाइजर)

हत्यारों की तत्काल गिरफ्तारी, फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई और एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की उठी आवाज, जिलाधिकारी के माध्यम से राज्यपाल को भेजा ज्ञापन

अम्बेडकरनगर।

जनपद जौनपुर में अधिवक्ता गयादीन अहिरवार की अपहरण के बाद निर्मम हत्या की घटना ने अधिवक्ता समाज को झकझोर कर रख दिया है। कानून और न्याय की लड़ाई लड़ने वाले एक अधिवक्ता की इस तरह हत्या किए जाने से साथी अधिवक्ताओं में गहरा आक्रोश और असुरक्षा की भावना व्याप्त है। घटना के विरोध में अब अम्बेडकरनगर के अधिवक्ताओं ने भी आवाज बुलंद करते हुए प्रदेश सरकार से न्याय और सुरक्षा की ठोस गारंटी मांगी है।

बार एसोसिएशन अम्बेडकरनगर ने इस हृदयविदारक घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए महामहिम राज्यपाल एवं उत्तर प्रदेश सरकार से प्रभावी कार्रवाई की मांग की है। इसी क्रम में 3 नवंबर 2026 को जिलाधिकारी अम्बेडकरनगर के माध्यम से राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन प्रेषित किया गया।

अधिवक्ताओं ने मांग की है कि मृतक अधिवक्ता गयादीन अहिरवार के आश्रित परिवार को एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाए, ताकि इस असहनीय संकट की घड़ी में परिवार को आर्थिक संबल मिल सके। साथ ही घटना में शामिल आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार कर उनके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए और मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से कराई जाए, जिससे पीड़ित परिवार को जल्द न्याय मिल सके।

इतना ही नहीं, अधिवक्ताओं ने मृतक के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने तथा उत्तर प्रदेश में अधिवक्ताओं की सुरक्षा के लिए एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई है।

अधिवक्ताओं की सुरक्षा पर सरकार से जवाबदेही की मांग

अधिवक्ताओं का कहना है कि न्याय व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अधिवक्ता यदि स्वयं सुरक्षित नहीं हैं तो यह गंभीर चिंता का विषय है। अधिवक्ताओं की सुरक्षा केवल किसी एक संगठन की मांग नहीं, बल्कि न्यायिक व्यवस्था से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति की सुरक्षा और सम्मान का सवाल है।

जौनपुर की घटना ने एक बार फिर अधिवक्ताओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक के परिवार को न्याय दिलाने के साथ-साथ भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस सुरक्षा व्यवस्था और प्रभावी कानून की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

बार एसोसिएशन अम्बेडकरनगर के अध्यक्ष सुनील कुमार यादव एवं सचिव अनिल कुमार वर्मा की ओर से इस मांग को शासन तक पहुंचाया गया है। अब निगाहें प्रदेश सरकार पर टिकी हैं कि वह अधिवक्ता समाज की इन मांगों पर कितनी गंभीरता से कार्रवाई करती है।

एक अधिवक्ता की असामयिक मौत ने फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब न्याय की पैरवी करने वाले ही सुरक्षित नहीं होंगे, तो समाज में कानून के राज और सुरक्षा का भरोसा कैसे मजबूत होगा?

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डिस्क्लेमर :

यह समाचार बार एसोसिएशन अम्बेडकरनगर की ओर से उठाई गई मांगों और उपलब्ध दस्तावेज के आधार पर तैयार किया गया है। जौनपुर की घटना से संबंधित आपराधिक तथ्यों एवं पुलिस कार्रवाई की स्वतंत्र पुष्टि आधिकारिक स्रोतों से की जानी अपेक्षित है। समाचार का उद्देश्य अधिवक्ता समाज की मांगों और सुरक्षा से जुड़े सार्वजनिक मुद्दे को सामने लाना है। किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना इसका उद्देश्य नहीं है। दोषसिद्धि का अंतिम अधिकार न्यायालय को है।

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