अकबरपुर में भूमि विवाद ने पकड़ा तूल: अनुसूचित जाति परिवार ने निजी जमीन पर जबरन रास्ता बनाने और दीवार गिराने का लगाया आरोप

खबर की तहतक |

अंबेडकरनगर

जनपद अंबेडकरनगर के अकबरपुर तहसील क्षेत्र स्थित जलालपुर रोड रेलवे क्रॉसिंग के समीप एक अनुसूचित जाति परिवार की भूमि को लेकर विवाद सामने आया है। मामले में पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि कुछ लोगों ने उनकी खतौनी दर्ज निजी भूमि से कथित रूप से जबरन रास्ता निकालने का प्रयास किया। घटना से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।

 

पीड़ित परिवार का आरोप है कि जब उन्होंने कथित अतिक्रमण और रास्ता बनाए जाने का विरोध किया तो विपक्षी पक्ष ने दबाव बनाते हुए उनकी दीवार गिराने का प्रयास किया। पीड़ितों का कहना है कि उन्होंने पूरे घटनाक्रम की शिकायत प्रशासन एवं पुलिस से करते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

शिकायती पत्र के अनुसार, पीड़ित ने कुछ नामजद व्यक्तियों के साथ दो अज्ञात लोगों को भी घटना में शामिल बताया है। हालांकि, इस मामले में नामजद अथवा अन्य आरोपित पक्ष का कोई आधिकारिक पक्ष अभी तक सामने नहीं आया है।

पीड़ित परिवार ने राजस्व विभाग से मौके पर भूमि की पैमाइश कराने, वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने तथा यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई किए जाने की मांग की है। शिकायत में अनुसूचित जाति परिवार होने के कारण आवश्यक होने पर एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रावधानों के तहत भी कार्रवाई की मांग की गई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में विकास कार्यों और सड़क चौड़ीकरण के चलते भूमि संबंधी विवाद बढ़ रहे हैं। ऐसे में प्रशासन द्वारा समयबद्ध एवं निष्पक्ष जांच कराए जाने से भविष्य में किसी भी प्रकार के विवाद और तनाव की स्थिति को रोका जा सकता है।

अब निगाहें जिला प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई पर टिकी हैं कि जांच के बाद मामले में क्या तथ्य सामने आते हैं और क्या विधिक कार्रवाई की जाती है।

डिस्क्लेमर

यह समाचार पीड़ित पक्ष द्वारा दिए गए शिकायती पत्र, उपलब्ध वीडियो तथा प्राप्त जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। इस समाचार में वर्णित सभी आरोप शिकायतकर्ता के हैं। “खबर की तहतक” इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता। संबंधित पक्ष का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी समान प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। किसी भी व्यक्ति को न्यायालय अथवा सक्षम प्राधिकारी द्वारा दोषी ठहराए जाने तक दोषी नहीं माना जा सकता। प्रशासनिक एवं राजस्व जांच की अंतिम रिपोर्ट के आधार पर ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

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