राम मंदिर ट्रस्ट की भूमि खरीद मामले में SIT की जांच तेज, महासचिव चंपत राय समेत पदाधिकारियों से पूछताछ; दस्तावेज और बैंक रिकॉर्ड तलब

खबर की तहतक | विशेष रिपोर्ट

अयोध्या।

राम जन्मभूमि से जुड़े कथित भूमि खरीद प्रकरण की जांच एक बार फिर तेज हो गई है। विशेष जांच दल (SIT) ने अयोध्या पहुंचकर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा वर्ष 2021 से अब तक खरीदी गई जमीनों से संबंधित दस्तावेजों, बैंक लेनदेन और अन्य अभिलेखों की जांच शुरू कर दी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जांच के दौरान ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्ट सदस्य डॉ. अनिल मिश्र तथा गोपाल राव से पूछताछ भी की गई है।

सूत्रों के अनुसार, SIT ने ट्रस्ट से वर्ष 2021 से वर्तमान तक हुई सभी भूमि खरीद के दस्तावेज, भुगतान संबंधी रिकॉर्ड तथा बैंकिंग लेनदेन का विवरण मांगा है। बताया जा रहा है कि जांच टीम संबंधित राजस्व अभिलेखों, खतौनी, खसरा, दाखिल-खारिज, भूमि माप एवं स्वामित्व से जुड़े दस्तावेजों का भी परीक्षण कर रही है।

यह मामला वर्ष 2021 में उस समय चर्चा में आया था, जब आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने आरोप लगाया था कि ट्रस्ट ने कम कीमत वाली जमीनों को अधिक मूल्य पर खरीदकर दानदाताओं की धनराशि का दुरुपयोग किया। हाल ही में चढ़ावा से जुड़े कथित विवाद के बाद उन्होंने इस मुद्दे को पुनः उठाते हुए SIT को संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए और निष्पक्ष जांच की मांग की।

सूत्रों का कहना है कि जांच एजेंसियां पहले प्रस्तुत दस्तावेजों का प्रारंभिक सत्यापन करा चुकी हैं। अब अयोध्या में संबंधित विभागों से मूल अभिलेखों का मिलान किया जा रहा है। साथ ही, आवश्यकता पड़ने पर राजस्व विभाग के अधिकारियों एवं भूमि खरीद-बिक्री से जुड़े अन्य व्यक्तियों से भी पूछताछ की जा सकती है।

बताया जा रहा है कि SIT वर्ष 2021 के बाद ट्रस्ट द्वारा खरीदी गई अन्य भूमि के अभिलेखों की भी जांच कर रही है। हालांकि, जांच एजेंसी की ओर से अब तक इस संबंध में कोई आधिकारिक निष्कर्ष या आरोपपत्र सार्वजनिक नहीं किया गया है।

डिस्क्लेमर

खबर की तहतक यह स्पष्ट करता है कि यह समाचार विभिन्न मीडिया रिपोर्टों एवं उपलब्ध सार्वजनिक सूचनाओं के आधार पर तैयार किया गया है। इस मामले में जांच अभी जारी है और किसी भी व्यक्ति, संस्था या ट्रस्ट को किसी न्यायालय द्वारा दोषी घोषित नहीं किया गया है। समाचार में उल्लिखित आरोप संबंधित पक्षों द्वारा लगाए गए आरोप हैं, जिनकी सत्यता का अंतिम निर्धारण सक्षम जांच एजेंसी एवं न्यायालय द्वारा किया जाएगा। यदि संबंधित पक्ष अपना आधिकारिक पक्ष या स्पष्टीकरण देना चाहता है, तो खबर की तहतक उसे प्रमुखता से प्रकाशित करेगा।

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