किसानों को निःशुल्क बिजली कनेक्शन देने की मांग, ऊर्जा मंत्री को सौंपा प्रार्थना पत्र

वेब पोर्टल “खबर की तहतक”

लखनऊ/अम्बेडकरनगर।

क्षेत्र के किसानों को निःशुल्क बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराने की मांग को लेकर अधिवक्ता एवं समाजसेवी विशाल त्रिपाठी एडवोकेट ने प्रदेश के ऊर्जा मंत्री को प्रार्थना पत्र सौंपा। इस दौरान उन्होंने किसानों के सामने आ रही विद्युत संबंधी समस्याओं को प्रमुखता से उठाते हुए सरकार से प्रभावी कदम उठाने की मांग की।

ऊर्जा मंत्री को दिए गए प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में किसान आज भी कृषि कार्यों के लिए आवश्यक बिजली कनेक्शन से वंचित हैं। इसके कारण सिंचाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है तथा किसानों को आर्थिक एवं व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

विशाल त्रिपाठी ने मांग की कि पात्र किसानों को प्राथमिकता के आधार पर निःशुल्क बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराया जाए, ताकि खेती की लागत कम हो सके और किसानों को राहत मिल सके। उन्होंने यह भी आग्रह किया कि बिजली कनेक्शन के लिए लंबित पड़े आवेदनों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित किया जाए तथा ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत सुविधाओं को और अधिक सुलभ बनाया जाए।

उन्होंने कहा कि किसान देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और उनकी समस्याओं का समाधान सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि किसानों को समय पर और सुगमता से विद्युत सुविधा उपलब्ध होगी तो कृषि उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

विशाल त्रिपाठी ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश सरकार किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए इस मांग पर सकारात्मक विचार करेगी और आवश्यक कदम उठाएगी। उन्होंने किसानों से संवाद बनाए रखने तथा उनकी समस्याओं को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने का भी भरोसा दिलाया।

इस पहल को क्षेत्र के किसानों की आवाज को सरकार तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।

डिस्क्लेमर:

यह समाचार ऊर्जा मंत्री को सौंपे गए प्रार्थना पत्र एवं विशाल त्रिपाठी एडवोकेट द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर प्रकाशित किया गया है। समाचार में वर्णित मांगें संबंधित व्यक्ति द्वारा सरकार के समक्ष रखे गए सुझाव एवं अनुरोध हैं। इन मांगों पर कोई निर्णय लिया जाना अथवा योजना लागू किया जाना संबंधित विभाग एवं राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में है। “खबर की तहतक” किसी प्रस्तावित निर्णय या सरकारी कार्रवाई की पुष्टि नहीं करता।

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