मदरसा संचालकों पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से बढ़ा विवाद, प्रबंधक ने दी तहरीर; कार्रवाई की उठी मांग

सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर बढ़ी नाराजगी, धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप

खबर की तहतक

अम्बेडकरनगर/जलालपुर।

सोशल मीडिया पर की गई कथित टिप्पणियों को लेकर जलालपुर क्षेत्र में मामला तूल पकड़ता नजर आ रहा है। मदरसा इस्लामिया दारुल कुरान साहब तारा के प्रबंधक हाजी तफसील अहमद ने एक युवक पर मदरसा संचालकों के खिलाफ कथित रूप से अभद्र एवं आपत्तिजनक टिप्पणियां करने का आरोप लगाते हुए कोतवाली जलालपुर में लिखित तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रबंधक हाजी तफसील अहमद का आरोप है कि अहमद फराज नामक युवक द्वारा पिछले कुछ दिनों से फेसबुक समेत अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मदरसों और उनसे जुड़े लोगों के विरुद्ध कथित रूप से आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया जा रहा है। आरोप है कि पोस्ट के माध्यम से मदरसा संचालकों पर गंभीर टिप्पणियां करते हुए उन्हें बेईमान बताया गया तथा धार्मिक मामलों को लेकर भ्रामक संदेश प्रसारित करने का प्रयास किया गया।

मामले को लेकर प्रबंधक ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि यदि किसी व्यक्ति को किसी संस्था, संचालक या कार्यप्रणाली को लेकर शिकायत है तो वह तथ्यों के आधार पर संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध अपनी बात रख सकता है, लेकिन किसी पूरे समुदाय या वर्ग को एक साथ निशाना बनाना सामाजिक दृष्टि से उचित नहीं माना जा सकता। उनका कहना है कि इस प्रकार की सार्वजनिक टिप्पणियां न केवल धार्मिक भावनाओं को प्रभावित कर सकती हैं, बल्कि सामाजिक सौहार्द एवं आपसी भाईचारे पर भी प्रतिकूल असर डाल सकती हैं।

बताया जा रहा है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रबंधक ने कोतवाली जलालपुर में लिखित तहरीर देकर आरोपी के विरुद्ध विधि सम्मत कार्रवाई की मांग की है। वहीं पुलिस द्वारा मामले की जांच कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई किए जाने का आश्वासन दिया गया है।

सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बीच ऐसे मामले लगातार यह सवाल भी खड़े कर रहे हैं कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाए रखना कितना आवश्यक हो गया है।

डिस्क्लेमर:

यह समाचार संबंधित पक्ष द्वारा दी गई लिखित तहरीर, आरोपों एवं स्थानीय स्तर पर प्राप्त जानकारी के आधार पर प्रकाशित किया गया है। खबर में उल्लिखित आरोप शिकायतकर्ता के कथन पर आधारित हैं। संबंधित युवक का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। जांच पूरी होने तक किसी भी व्यक्ति को दोषी मानना उचित नहीं है; अंतिम निष्कर्ष जांच एवं विधिक प्रक्रिया के अधीन होगा।

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