नगर पालिका में कर्मचारियों के भविष्य पर संकट? पीएफ और मेडिकल मद के लगभग 20 लाख रुपये गायब होने के आरोप से उठे गंभीर सवाल

खबर की तहतक

अम्बेडकरनगर/जलालपुर।

जलालपुर नगर पालिका परिषद से जुड़ा एक मामला अब प्रशासनिक कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। करीब 125 कर्मचारियों के भविष्य निधि (पीएफ) और मेडिकल मद से जुड़ी लगभग 20 लाख रुपये की धनराशि को लेकर गबन के आरोप सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार स्थानीय सभासद आशीष सोनी ने जिलाधिकारी को एक पत्र भेजकर मामले की जांच की मांग की है। आरोप लगाया गया है कि रेखा सिक्योरिटी कंपनी द्वारा लगभग तीन वर्ष पूर्व नगर पालिका में कर्मचारियों की नियुक्ति की गई थी। कंपनी का अनुबंध अवधि पूरी होने के बावजूद कर्मचारियों के सात से आठ माह के पीएफ और मेडिकल मद का पैसा संबंधित खातों में जमा नहीं किया गया।

आरोप है कि कर्मचारियों के वेतन से संबंधित मद में कटौती होने के बावजूद करीब 20 लाख रुपये की राशि जमा नहीं की गई और कंपनी कथित रूप से धनराशि लेकर गायब हो गई। मामले में एक और गंभीर आरोप यह भी लगाया गया है कि कंपनी की समयावधि समाप्त होने के बाद नगर पालिका प्रशासन द्वारा उसकी सुरक्षा जमा राशि भी वापस कर दी गई।

अब सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि यदि कर्मचारियों के हितों से जुड़ी धनराशि समय पर जमा नहीं हुई, तो निगरानी और सत्यापन की जिम्मेदारी किसकी थी? क्या संबंधित अधिकारियों द्वारा आवश्यक जांच और वित्तीय प्रक्रिया का पालन किया गया था, या फिर कहीं प्रशासनिक स्तर पर गंभीर चूक हुई?

इस पूरे मामले ने उन कर्मचारियों की चिंता बढ़ा दी है, जिनकी मेहनत और भविष्य की सुरक्षा से जुड़ी राशि पर सवाल खड़े हो गए हैं। सभासद ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराते हुए दोषी अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की मांग की है।

अब निगाहें प्रशासनिक जांच और उससे निकलने वाले तथ्यों पर टिकी हैं, क्योंकि मामला केवल धनराशि का नहीं, बल्कि कर्मचारियों के अधिकार और विश्वास से भी जुड़ा हुआ है।

डिस्क्लेमर:

यह समाचार उपलब्ध लिखित शिकायत, आरोपों एवं प्राप्त जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। समाचार में उल्लिखित आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि होना शेष है। संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आने अथवा प्रशासनिक जांच रिपोर्ट के आधार पर तथ्यों में परिवर्तन संभव है। जांच पूरी होने तक किसी भी व्यक्ति या संस्था को दोषी मानना उचित नहीं होगा।

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