न्यायालय में विचाराधीन भूमि पर पेड़ कटने का आरोप, तहसील प्रशासन की कार्रवाई पर उठे सवाल

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अम्बेडकरनगर/जलालपुर।

जलालपुर तहसील क्षेत्र के आजनपारा गांव में न्यायालय में विचाराधीन भूमि पर प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर नया विवाद सामने आया है। मामले ने स्थानीय स्तर पर कानूनी प्रक्रिया, प्रशासनिक कार्यवाही और पर्यावरणीय पहलुओं को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

गांव निवासी विक्रम यादव ने आरोप लगाया है कि गाटा संख्या 91 ख से संबंधित भूमि विवाद वर्ष 2008 से माननीय दीवानी न्यायालय में लंबित है और अभी तक न्यायालय में उसका अंतिम निस्तारण नहीं हुआ है। इसके बावजूद शुक्रवार को तहसील प्रशासन की टीम पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची और भूमि पर लगे लिप्टन (यूकेलिप्टस) के पेड़ों को कटवाने की कार्रवाई की गई।

पीड़ित का आरोप है कि तहसीलदार निखिलेश कुमार तथा मालीपुर थाना अध्यक्ष स्वतंत्र मौर्य पुलिस टीम के साथ पहुंचे और विवादित भूमि पर खड़े पेड़ों को कटवाकर गिरा दिया गया। उनका कहना है कि जब भूमि स्वामित्व का मामला न्यायालय में विचाराधीन है तो प्रशासन ने किस आधार पर कार्रवाई की, यह एक गंभीर प्रश्न है।

विक्रम यादव ने अपने गांव के रामकरन यादव समेत कुछ अन्य लोगों पर भी आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि संबंधित पक्ष प्रभाव का इस्तेमाल कर प्रशासनिक कार्रवाई को प्रभावित कर रहा है। उनका आरोप है कि न्यायालय में लंबित प्रकरण के बीच दबाव बनाकर यह कार्रवाई कराई गई।

इस बीच घटना को लेकर पर्यावरणीय पहलू भी चर्चा का विषय बन गया है। एक ओर सरकार विभिन्न अभियानों के माध्यम से लोगों को पौधारोपण और हरित वातावरण के लिए प्रेरित कर रही है, वहीं दूसरी ओर पेड़ों की कटान को लेकर स्थानीय लोगों के बीच अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पेड़ पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और ऐसे मामलों में स्पष्ट प्रशासनिक व कानूनी स्थिति सामने आनी चाहिए।

पत्रकारों द्वारा तहसीलदार जलालपुर निखिलेश चौधरी से पक्ष जानने का प्रयास भी किया गया तो उन्होंने इन्कार कर दिया, हालांकि इस संबंध में कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आ सकी। वहीं क्षेत्र में यह मामला चर्चा और बहस का विषय बना हुआ है कि यदि भूमि विवाद न्यायालय में लंबित है तो कार्रवाई किन परिस्थितियों और आधारों पर की गई।

फिलहाल पीड़ित ने उच्चाधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई की मांग की है। मामले को लेकर क्षेत्र में संवेदनशील स्थिति बनी हुई है और लोग प्रशासन की ओर से स्पष्ट स्थिति आने का इंतजार कर रहे हैं।

डिस्क्लेमर:

यह समाचार संबंधित पक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों, स्थानीय स्तर पर प्राप्त सूचनाओं तथा उपलब्ध तथ्यों के आधार पर तैयार किया गया है। “खबर की तहतक” समाचार में वर्णित आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता है। मामले से जुड़े प्रशासनिक अधिकारियों अथवा अन्य संबंधित पक्ष का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। चूंकि प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन बताया जा रहा है, इसलिए अंतिम सत्य एवं वैधानिक स्थिति न्यायालय के निर्णय और सक्षम प्राधिकारी की जांच के अधीन होगी।

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