201 गुमशुदा मोबाइल लौटाकर अम्बेडकरनगर पुलिस ने लौटाई लोगों की मुस्कान, 40 लाख से अधिक की संपत्ति बरामद

 

अम्बेडकरनगर | खबर की तहतक ✍️

मोबाइल खो जाने के बाद अक्सर लोगों की चिंता सिर्फ एक उपकरण खोने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि उसमें सुरक्षित निजी दस्तावेज, जरूरी संपर्क और अनगिनत यादें भी उनसे दूर हो जाती हैं। ऐसे में अम्बेडकरनगर पुलिस ने एक सराहनीय पहल करते हुए 201 गुमशुदा मोबाइल फोन बरामद कर उनके वास्तविक स्वामियों को वापस सौंपकर लोगों के चेहरों पर फिर से मुस्कान लौटा दी।

पुलिस अधीक्षक सुश्री प्राची सिंह के निर्देशन तथा अपर पुलिस अधीक्षक (पश्चिमी) हरेन्द्र कुमार एवं अपर पुलिस अधीक्षक (पूर्वी) डॉ. तेजवीर सिंह के पर्यवेक्षण में मोबाइल रिकवरी सेल (सर्विलांस सेल) की टीम ने लगातार अथक प्रयासों से जनपद के विभिन्न थाना क्षेत्रों से कुल 201 गुमशुदा मोबाइल फोन बरामद किए। इन मोबाइलों की अनुमानित कीमत करीब 40 लाख 20 हजार रुपये बताई गई है।

मोबाइल रिकवरी सेल द्वारा तकनीकी संसाधनों और सर्विलांस की सहायता से बरामद किए गए मोबाइलों के धारकों को सूचित कर शुक्रवार को उनके मोबाइल वापस सौंपे गए। मोबाइल प्राप्त करने पहुंचे लोगों ने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए पुलिस टीम के कार्यों की सराहना की।

पुलिस अधीक्षक ने आमजन से अपील करते हुए कहा कि नागरिक अपने मोबाइल में ‘संचार साथी’ एप डाउनलोड करें, ताकि भविष्य में मोबाइल गुम होने की स्थिति में आवश्यक सहायता और जानकारी आसानी से प्राप्त की जा सके। साथ ही मोबाइल खोने की स्थिति में बिल, आईएमईआई नंबर, आधार कार्ड और अन्य पहचान पत्र के साथ स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराने की भी सलाह दी गई।

इस उल्लेखनीय सफलता में मोबाइल रिकवरी सेल की टीम के प्रभारी निरीक्षक संजय पाण्डेय, उपनिरीक्षक विनोद यादव, आरक्षी सौरभ पाण्डेय तथा आरक्षी अंकुर यादव की भूमिका महत्वपूर्ण रही।

खबर की तहतक का मानना है कि पुलिस की ऐसी पहल केवल गुम हुए सामान की बरामदगी नहीं, बल्कि आमजन के भरोसे और विश्वास को भी मजबूत करती है।

डिस्क्लेमर:

यह समाचार अम्बेडकरनगर पुलिस द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस-नोट और उपलब्ध प्रशासनिक जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। समाचार का उद्देश्य जनहित में सूचना प्रदान करना है। बरामदगी, मूल्यांकन अथवा अन्य तथ्य संबंधित विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए विवरण पर आधारित हैं। यदि भविष्य में किसी आधिकारिक जांच या सूचना में परिवर्तन होता है तो तथ्यों में संशोधन संभव है।

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