खबर की तहतक ✍️| विशेष रिपोर्ट अम्बेडकर नगर अंबेडकरनगर जनपद के जलालपुर तहसील क्षेत्र से एक चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां एक किसान की मेहनत बारिश के बीच बर्बादी की कगार पर पहुंच गई है। प्रशासनिक आदेश जारी होने के बावजूद किसान को अपनी खड़ी गेहूं की फसल काटने की अनुमति नहीं मिल रही, जिससे वह लगातार तहसील और जिला मुख्यालय के चक्कर लगाने को मजबूर है। मामला मलूकपुर बड़ा गांव का है, जहां पीड़ित किसान का आरोप है कि क्षेत्र के अन्य किसानों ने अपनी गेहूं की कटाई पूरी कर ली है, लेकिन उसकी फसल को विवादित भूमि के नाम पर रोक दिया गया है। इस बीच मौसम के लगातार खराब रहने और बारिश के कारण खेत में खड़ी फसल को भारी नुकसान हो रहा है। किसान का कहना है कि उसने इस संबंध में जिला अधिकारी को लिखित शिकायत दी थी, जिस पर आवश्यक निर्देश भी जारी किए गए थे। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर न तो आदेशों का पालन हो रहा है और न ही कोई ठोस कार्रवाई की जा रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर प्रशासनिक आदेशों की अनदेखी किसके संरक्षण में हो रही है। सूत्रों के अनुसार, जमीन से जुड़े विवाद के चलते फसल कटाई रोकी जा रही है, जबकि न्यायालय के आदेशों का पालन सुनिश्चित कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है। लेकिन वर्तमान स्थिति यह दर्शाती है कि जमीनी स्तर पर आदेशों का अनुपालन नहीं हो पा रहा, जिसका खामियाजा सीधे तौर पर किसान को भुगतना पड़ रहा है। लगातार हो रही बारिश के कारण हर दिन फसल के खराब होने का खतरा बढ़ता जा रहा है। इसके बावजूद संबंधित अधिकारी मौन साधे हुए हैं, जिससे पीड़ित किसान की परेशानी और बढ़ गई है। यह मामला न केवल एक किसान की आजीविका से जुड़ा है, बल्कि प्रशासनिक कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस प्रकरण में कब तक सक्रिय भूमिका निभाते हुए पीड़ित किसान को राहत दिला पाता है, या फिर एक और किसान की मेहनत यूं ही बारिश में बह जाएगी। Post navigation आंधी-तूफान की मार: पेड़ गिरने से भारतीय जन संगठन का कार्यालय ध्वस्त, भारी नुकसान घर गिराकर किया उत्पात, पीड़िता ने पुलिस से लगाई न्याय की गुहार