खबर की तहतक ✍️| ऑटो डेस्क मुंबई भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को लेकर एक बड़ी और राहत देने वाली खबर सामने आई है। आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक कारें आम लोगों की पहुंच में आ सकती हैं। इसकी वजह है देश में ही लिथियम आयरन फॉस्फेट (LFP) बैटरी से जुड़ी अहम तकनीक का बड़े पैमाने पर उत्पादन। दरअसल, हिमाद्री स्पेशलिटी केमिकल्स लिमिटेड अब भारत में ही LFP कैथोड एक्टिव मटेरियल बनाने की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ा रही है। यह वही मटेरियल है, जिसका इस्तेमाल EV बैटरी पैक तैयार करने में किया जाता है। अगर यह योजना ज़मीन पर उतरती है, तो EV बैटरी की कीमतों में भारी गिरावट तय मानी जा रही है। भारत में ही बनेगी EV बैटरी की सबसे अहम चीज़ हिमाद्री स्पेशलिटी केमिकल्स इस समय दुनिया की अग्रणी EV और बैटरी निर्माण कंपनियों से बातचीत कर रही है। कंपनी का लक्ष्य भारत में ही LFP कैथोड एक्टिव मटेरियल का उत्पादन कर उसे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सप्लाई करना है। कंपनी की योजना अगले पांच वर्षों में 100 GWh क्षमता के बराबर LFP मटेरियल की आपूर्ति करने की है। यह क्षमता भारत के साथ-साथ वैश्विक EV मार्केट की ज़रूरतों को भी पूरा करेगी। FY27 तक शुरू होगा पहला प्लांट हिमाद्री स्पेशलिटी का पहला LFP कैथोड एक्टिव मटेरियल प्लांट वित्त वर्ष 2026-27 की तीसरी तिमाही (Q3 FY27) तक शुरू होने की उम्मीद है। यह प्लांट ओडिशा में लगाया जाएगा। इस प्लांट की प्रस्तावित उत्पादन क्षमता 2 लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MTPA) होगी, जबकि इस पर करीब 1,125 करोड़ रुपये का निवेश अनुमानित है। खास बात यह है कि यह चीन के बाहर दुनिया का पहला इतना बड़ा LFP कैथोड मटेरियल प्लांट हो सकता है। क्यों इतनी खास है LFP बैटरी वर्तमान समय में दुनियाभर की EV कंपनियां तेजी से LFP बैटरी तकनीक की ओर शिफ्ट हो रही हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह इसकी कम लागत, लंबी उम्र और बेहतर सुरक्षा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, LFP बैटरियों की कीमत पारंपरिक बैटरियों के मुकाबले करीब आधी तक हो सकती है। साथ ही इनमें थर्मल रनअवे यानी आग लगने का खतरा भी काफी कम होता है। LFP बैटरियां: ज़्यादा सुरक्षित होती हैं 10 साल या उससे अधिक समय तक चल सकती हैं कोबाल्ट और निकेल से मुक्त होती हैं पर्यावरण के लिए बेहतर मानी जाती हैं। सिर्फ EV ही नहीं, दूसरे सेक्टर में भी बढ़ेगी मांग LFP बैटरियों का इस्तेमाल केवल इलेक्ट्रिक वाहनों तक सीमित नहीं है। इनका उपयोग सोलर एनर्जी स्टोरेज सिस्टम, पोर्टेबल पावर स्टेशन और अन्य एनर्जी स्टोरेज समाधानों में भी तेजी से बढ़ रहा है। यही वजह है कि आने वाले समय में इसका बाजार और भी बड़ा होने वाला है। EV ग्राहकों के लिए राहत की खबर अगर भारत में LFP कैथोड एक्टिव मटेरियल का उत्पादन सफल रहा, तो EV बैटरी पर आयात निर्भरता घटेगी। इससे बैटरी सस्ती होंगी और अंततः इलेक्ट्रिक कारों की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। यह पहल भारत को EV मैन्युफैक्चरिंग और बैटरी टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर मज़बूत बना सकती है। Post navigation इस पहाड़ पर हैं 900 से अधिक मंदिर, सूर्यास्त के बाद क्यों नहीं रुक सकता कोई इंसान? UP Budget 2026: 10 लाख नौकरियों का दावा, बेटियों की शादी में मिलेगा एक लाख; युवाओं और महिलाओं पर योगी सरकार का बड़ा दांव