खबर की तहतक ✍️| गुजरात के भावनगर जिले में स्थित पालीताना का शत्रुंजय पर्वत न सिर्फ आस्था का केंद्र है, बल्कि अपने अनोखे नियमों और रहस्यमयी परंपराओं के कारण भी पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। यह दुनिया का इकलौता ऐसा पर्वत माना जाता है, जहां 900 से अधिक जैन मंदिर एक ही पहाड़ पर स्थापित हैं। शत्रुंजय पर्वत जैन धर्म के सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक है। मान्यता है कि यहां पहले तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव सहित कई तीर्थंकरों ने तपस्या की थी। इसी कारण यह पर्वत जैन श्रद्धालुओं के लिए मोक्ष का मार्ग माना जाता है। सूर्यास्त के बाद क्यों खाली करा दिया जाता है पहाड़? इस पवित्र पर्वत की सबसे अनोखी परंपरा यह है कि सूर्यास्त होते ही पूरे पहाड़ से सभी श्रद्धालुओं और आम लोगों को बाहर भेज दिया जाता है। यहां रात में किसी भी व्यक्ति के रुकने की अनुमति नहीं है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शत्रुंजय पर्वत को देवताओं का निवास स्थान माना जाता है और रात के समय यहां केवल दिव्य शक्तियों का वास होता है। जैन संतों का मानना है कि सूर्यास्त के बाद यहां मानव का ठहरना पवित्रता भंग करने जैसा है। प्रशासन भी करता है नियमों का पालन यह नियम केवल परंपरा तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रशासनिक रूप से भी सख्ती से लागू किया जाता है। सूर्य ढलते ही सुरक्षाकर्मी पहाड़ पर मौजूद सभी लोगों को नीचे उतार देते हैं। चाहे श्रद्धालु हों, पर्यटक हों या पुजारी—कोई भी रात में वहां नहीं रुक सकता। भक्ति, वास्तुकला और अनुशासन का अनोखा संगम शत्रुंजय पर्वत पर बने मंदिर अपनी अद्भुत संगमरमर वास्तुकला, नक्काशी और शांति के लिए जाने जाते हैं। यहां तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को हजारों सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं, जिसे वे आस्था और तपस्या का प्रतीक मानते हैं। पालीताना और शत्रुंजय पर्वत यह संदेश देता है कि कुछ स्थान सिर्फ देखने के नहीं, बल्कि अनुशासन, श्रद्धा और नियमों के पालन के प्रतीक होते हैं। Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Like this:Like Loading… Related Post navigation सूनी आंखों में जमानेभर का दर्द… तलाक के बाद मां ने पिता की गोद से छीना बेटा, जार-जार रो पड़ा पिता EV Battery: इलेक्ट्रिक कार की कीमत हो सकती है आधी, भारत में LFP बैटरी से आएगा बड़ा बदलाव