डेढ़ लाख के कर्ज में किसान की जमीन कुर्क, 15 दिन में नीलामी की चेतावनी

खबर की तहतक न्यूज नेटवर्क

संवाददाता – अनिल यादव

खेत में गड़ी लाल झंडियां देख छलक उठा गरीब किसान का दर्द, किसान संगठनों ने कर्जमाफी की उठाई मांग

फूलपुर, आजमगढ़।

जिस जमीन पर एक गरीब किसान ने वर्षों तक पसीना बहाया।

जिस खेत की मिट्टी से उसके परिवार की रोजी-रोटी जुड़ी रही।

आज उसी जमीन पर लाल झंडियां गाड़ दी गईं।

फूलपुर तहसील क्षेत्र के विकासखंड पवई अंतर्गत ग्राम सभा खंडौरा निवासी किसान मेवालाल के मामले ने ग्रामीणों और किसान संगठनों को चिंता में डाल दिया है। आरोप है कि किसान के ऊपर किसान क्रेडिट कार्ड का पुराना कर्ज बकाया होने के चलते 6 अक्टूबर 2026 को बैंक कर्मचारियों और तहसील के राजस्व कर्मियों की मौजूदगी में उसकी खेती की जमीन कुर्क करने की कार्रवाई की गई।

बताया गया कि मेवालाल ने वर्ष 2007 में करीब 1.50 लाख रुपये का किसान क्रेडिट कार्ड ऋण लिया था। खेती में लगातार नुकसान, मौसम की मार, बाढ़-सूखा और फसलों का उचित मूल्य नहीं मिलने के कारण वह कथित तौर पर समय से ऋण की अदायगी नहीं कर सका।

ग्रामीणों के अनुसार, 6 अक्टूबर को बैंक कर्मचारी और राजस्व कर्मी किसान के घर पहुंचे। इसके बाद खेत के चारों ओर लाल झंडियां लगाकर जमीन को कुर्क किए जाने की कार्रवाई की गई। किसान को कथित तौर पर नोटिस देते हुए 15 दिन के भीतर बकाया राशि जमा नहीं करने पर जमीन की नीलामी किए जाने की चेतावनी दी गई।

यह दृश्य देखकर किसान परिवार और ग्रामीणों में मायूसी फैल गई। जिस खेत को किसान अपनी मेहनत और जीवन का सहारा मानता था, उसी पर कुर्की की कार्रवाई ने परिवार की चिंता बढ़ा दी है।

ग्रामीणों का कहना है कि किसान पहले ही मौसम और आर्थिक परेशानियों से जूझ रहा है। ऐसे में खेती की जमीन चली जाने का डर उसके लिए किसी बड़े संकट से कम नहीं है।

किसान नेताओं ने उठाए सवाल

पूर्वांचल किसान यूनियन के महासचिव वीरेंद्र यादव और सोशलिस्ट किसान सभा के महासचिव राजीव यादव ने संयुक्त बयान जारी कर इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।

किसान नेताओं का आरोप है कि एक ओर बड़े कर्जदारों को राहत मिलने की खबरें सामने आती हैं, वहीं दूसरी ओर छोटे और गरीब किसान के लिए जमीन कुर्क और नीलामी की कार्रवाई की जा रही है।

उन्होंने वित्तीय वर्ष 2025-26 में कॉरपोरेट क्षेत्र के बड़े ऋणों को लेकर सामने आए 3.20 लाख करोड़ रुपये के बट्टे खाते में डाले जाने के आंकड़े का हवाला देते हुए कहा कि सरकार को छोटे किसानों के प्रति भी मानवीय और संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।

किसान नेताओं ने सवाल उठाया कि जब बड़े आर्थिक हितों को राहत दी जा सकती है, तो डेढ़ लाख रुपये के पुराने कर्ज में फंसे एक गरीब किसान के लिए राहत का रास्ता क्यों नहीं निकाला जा सकता?

किसान संगठनों की चार प्रमुख मांगें

किसान नेताओं ने प्रशासन और सरकार से मांग की है कि—

1. किसान मेवालाल की जमीन की कुर्की की कार्रवाई तत्काल वापस ली जाए और उसके कर्ज पर मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए राहत दी जाए।

2. 15 दिन में जमीन की नीलामी किए जाने की कथित चेतावनी को तत्काल वापस लिया जाए।

3. छोटे और सीमांत किसानों के किसान क्रेडिट कार्ड ऋण के लिए एकमुश्त कर्जमाफी की नीति लागू की जाए।

4. जब तक किसानों के कर्ज को लेकर स्थायी नीति नहीं बनती, तब तक छोटे किसानों की कृषि भूमि की कुर्की और नीलामी पर रोक लगाने पर विचार किया जाए।

आंदोलन की चेतावनी

किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि किसान मेवालाल की जमीन की कुर्की वापस नहीं ली गई और मामले का समाधान नहीं निकाला गया, तो किसान संगठनों की ओर से फूलपुर तहसील से लेकर पूरे पूर्वांचल तक जनअभियान चलाया जाएगा।

यह मामला केवल एक किसान की जमीन का नहीं, बल्कि उन हजारों छोटे किसानों की चिंता को भी सामने लाता है, जिनकी आजीविका खेती की जमीन पर निर्भर है। सवाल यही है कि कर्ज के बोझ तले दबे किसान को राहत मिलेगी या उसकी आखिरी उम्मीद—उसकी जमीन—भी उससे छिन जाएगी?

डिस्क्लेमर :

यह समाचार उपलब्ध कराए गए विवरण, ग्रामीणों के कथनों और किसान संगठनों द्वारा लगाए गए आरोपों के आधार पर तैयार किया गया है। कर्ज, कुर्की और नीलामी की कार्रवाई से संबंधित आधिकारिक अभिलेखों तथा संबंधित बैंक/प्रशासन का पक्ष अलग से प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जा सकता है। किसी व्यक्ति या संस्था की कानूनी जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण सक्षम न्यायालय/प्राधिकरण द्वारा ही किया जा सकता है।

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