रिश्तों की मीठी बातों के पीछे छिपे स्वार्थ पर करारा प्रहार, पढ़िए Archana Singh की कविता “प्रतिघाती से बचकर रहना”

खबर की तहतक न्यूज नेटवर्क

साहित्यिक विशेष

कुछ रिश्ते सामने से बेहद अपनत्व भरे नजर आते हैं, लेकिन समय आने पर उनके व्यवहार की सच्चाई सामने आ जाती है। इसी सामाजिक अनुभव, सतर्कता और आत्मरक्षा की भावना को शब्द देती है रचनाकार Archana Singh की कविता “प्रतिघाती से बचकर रहना”।

कविता में ऐसे लोगों के व्यवहार को रेखांकित किया गया है, जो सामने मीठी बातें करते हैं, निजी बातें जानने की कोशिश करते हैं और किसी की मजबूरी या परेशानी को दूसरों के बीच चर्चा का विषय बना सकते हैं।

रचना का स्वर केवल शिकायत का नहीं, बल्कि सावधान रहने और ईश्वर से संरक्षण की प्रार्थना का भी है। कविता पाठक को यह सोचने पर मजबूर करती है कि हर मुस्कान के पीछे सच्ची आत्मीयता हो, यह जरूरी नहीं।

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प्रतिघाती से बचकर रहना,

सदा बनाए रखना दूरी,

कभी जो जानें मेरी मजबूरी,

ढिंढोरा पीटें सरे बाज़ार।

 

मुँह पर चिकनी-चुपड़ी बातें,

पीछा भी ये न छोड़ें,

करते रहते कोशिश हज़ार,

किसी तरह कर दें बंटाधार।

 

मुँह पर राम, बगल में छुरी,

कब पाएँ, कब काटें मूड़ी,

कब मौका पाकर वार करें,

इनकी नीयत बड़ी छिछोरी।

 

बेशर्मी की चादर ओढ़े,

बातें बनाएँ हज़ार,

खुशी जो जानें, मुँह लटका लें,

दुख जानें तो चमकें बारंबार।

 

हाल-चाल के बहाने आकर,

राज़ जानने को बेताब,

मौका पाते ही जीवन में

भर दें ढेर सारा अज़ाब।

 

ऐसी भीड़ से मुझे बचाना,

विनती तुमसे बारंबार,

मुँह पर मीठी, मन में खोटी,

ऐसे जन से रखना पार।

 

अपना हाथ सदा सिर पर रखना,

दूर रहे हर वार,

प्रतिघाती से बचाकर रखना,

हे प्रभु, करना बेड़ा पार।

— Archana Singh, रचनाकार

रचना का भाव

यह कविता उन अनुभवों को सामने लाती है, जहां विश्वास, निजता और रिश्तों की परख जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाते हैं। रचना का संदेश स्पष्ट है—हर व्यक्ति से वैमनस्य रखने के बजाय अपनी सीमाओं, निजी बातों और विश्वास की रक्षा करना आवश्यक है।

डिस्क्लेमर:

यह साहित्यिक प्रस्तुति रचनाकार की कविता और उसमें व्यक्त भावों पर आधारित है। कविता में प्रयुक्त विचार एवं अभिव्यक्तियां साहित्यिक संदर्भ में हैं और किसी विशिष्ट व्यक्ति या समुदाय के संबंध में आरोप के रूप में नहीं ली जानी चाहिए।

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