दर्द से कराह रही गाय को मिला जीवनदान, डॉक्टर धर्मेंद्र यादव की सूझबूझ से सफल ऑपरेशन

खबर की तहतक न्यूज नेटवर्क

जलालपुर/मालीपुर।

एक ओर जहां गंभीर स्थिति में पहुंच चुके पशुओं के उपचार को लेकर पशुपालक अक्सर परेशान नजर आते हैं, वहीं मालीपुर क्षेत्र में पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. धर्मेंद्र यादव की तत्परता और चिकित्सकीय प्रयास की स्थानीय लोगों द्वारा सराहना की जा रही है।

जानकारी के अनुसार ग्राम बड़ेपुर लखनिया निवासी ओमप्रकाश उपाध्याय की गाय कथित रूप से टांस/एमपीडी जैसी समस्या से परेशान थी। समस्या के चलते गाय को चलने-फिरने में काफी परेशानी हो रही थी और पशुपालक भी उसके स्वास्थ्य को लेकर चिंतित थे।

बताया गया कि ऐसी स्थिति में ऑपरेशन करना चुनौतीपूर्ण माना जाता है और कई बार पशु चिकित्सकों के सामने भी उपचार को लेकर जटिल परिस्थितियां उत्पन्न हो जाती हैं। इसी बीच पशु चिकित्सा अधिकारी मालीपुर डॉ. धर्मेंद्र यादव ने मामले को गंभीरता से लेते हुए गाय का ऑपरेशन किया।

पशुपालक के अनुसार ऑपरेशन के बाद गाय की स्थिति में तत्काल सुधार दिखाई दिया और वह कुछ ही समय बाद अपने पैरों पर चलने लगी। परिजनों एवं स्थानीय लोगों के लिए यह क्षण राहत और भावुक कर देने वाला रहा। लंबे समय से परेशानी झेल रही बेजुबान गाय को दोबारा चलते देखकर पशुपालक के चेहरे पर भी संतोष नजर आया।

स्थानीय लोगों ने डॉ. धर्मेंद्र यादव के प्रयास की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि पशुओं के प्रति संवेदनशीलता और समय पर उपचार उनके लिए बड़ी राहत साबित हुआ। हालांकि किसी भी चिकित्सकीय प्रक्रिया की सफलता कई परिस्थितियों पर निर्भर करती है, लेकिन इस मामले में पशुपालक द्वारा बताए गए तत्काल सुधार को लेकर क्षेत्र में डॉक्टर के प्रयास की चर्चा है।

खबर की तहतक पशु चिकित्सा से जुड़े ऐसे मामलों में विशेषज्ञों की भूमिका, पशुपालकों की जागरूकता और बेजुबान पशुओं के समय पर उपचार के महत्व को सामने लाने का प्रयास करता है।

डिस्क्लेमर:

यह समाचार पशुपालक एवं स्थानीय स्तर से प्राप्त जानकारी/दावों के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें वर्णित चिकित्सकीय स्थिति, ऑपरेशन तथा तत्काल सुधार संबंधी दावों का स्वतंत्र चिकित्सकीय सत्यापन खबर की तहतक द्वारा नहीं किया गया है। पशुओं की बीमारी या उपचार से संबंधित किसी भी निर्णय के लिए योग्य पशु चिकित्सक की सलाह लेना आवश्यक है। समाचार का उद्देश्य किसी चिकित्सक या चिकित्सा पद्धति के संबंध में बिना स्वतंत्र सत्यापन के अंतिम निष्कर्ष प्रस्तुत करना नहीं है।

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