हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी नहीं मिला मानदेय, डीएम ने उठाया सख्त कदम

खबर की तहतक न्यूज नेटवर्क

संवाददाता – अनिल यादव

आजमगढ़/पवई।

कभी गांव की स्वच्छता व्यवस्था को संभालने वाली एक महिला को अपने मेहनताने के लिए न्याय की चौखट तक जाना पड़े और न्यायालय के आदेश के बाद भी भुगतान के लिए इंतजार करना पड़े—तो यह महज एक मानदेय का मामला नहीं, बल्कि व्यवस्था की संवेदनशीलता पर भी सवाल खड़ा करता है।

मामला आजमगढ़ जनपद के पवई विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत सलारपुर का है। यहां की निवासी श्रीमती सुशीला पत्नी लालजी, जो ग्राम पंचायत में सामुदायिक शौचालय की केयरटेकर के रूप में कार्य करने का दावा करती हैं, ने अपने पारिश्रमिक/मानदेय के भुगतान को लेकर उच्च न्यायालय इलाहाबाद का दरवाजा खटखटाया था। प्रस्तुत आदेश में सिविल रिट याचिका संख्या W-010869/2026 का उल्लेख किया गया है।

आदेश के अनुसार, माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद द्वारा 11 अगस्त 2026 को पारित निर्देश के क्रम में जिला पंचायत राज अधिकारी, आजमगढ़ को याचिकाकर्ता को मानदेय का भुगतान कर व्यक्तिगत शपथ पत्र के साथ न्यायालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे। आदेश में यह भी उल्लेख है कि भुगतान के संबंध में अपेक्षित कार्रवाई समय से नहीं हुई।

इसके बाद मामला जिला प्रशासन के संज्ञान में पहुंचा। जिला मजिस्ट्रेट, आजमगढ़ द्वारा जारी आदेश में प्रशासनिक दायित्वों और शक्तियों के कथित दुरुपयोग के संबंध में शासनादेशों एवं न्यायालयीय निर्देशों का उल्लेख करते हुए ग्राम पंचायत सलारपुर की प्रशासनिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। आदेश में वर्तमान निर्वाचित प्रधान को हटाकर उनके स्थान पर सहायक विकास अधिकारी (पंचायत), पवई को प्रशासक/नामित प्रशासक नियुक्त करने के निर्देश दिए गए हैं।

जिलाधिकारी ने यह भी निर्देशित किया है कि ग्राम पंचायत के वित्तीय एवं प्रशासनिक कार्यों का तत्काल प्रभाव से संचालन सुनिश्चित किया जाए तथा याचिकाकर्ता के मानदेय भुगतान की कार्यवाही पूर्ण कर अवमानतावादी के समक्ष प्रस्तुत करना सुनिश्चित किया जाए।

यह पूरा घटनाक्रम एक बड़ा सवाल छोड़ जाता है—अगर मेहनत करने वाले व्यक्ति को उसके हक के भुगतान के लिए न्यायालय तक जाना पड़े, फिर न्यायालय के आदेश के बाद भी इंतजार करना पड़े, तो आखिर व्यवस्था की जवाबदेही किसकी है?

हालांकि, आदेश में दर्ज तथ्यों और प्रशासनिक कार्रवाई को ही आधार बनाया जाना चाहिए तथा किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने का अंतिम निर्णय सक्षम प्राधिकारी/न्यायालय द्वारा ही किया जा सकता है।

खबर की तहतक इस मामले में संबंधित अधिकारियों और ग्राम पंचायत पक्ष का आधिकारिक पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित करेगा।

डिस्क्लेमर :

यह खबर उपलब्ध जिला मजिस्ट्रेट, आजमगढ़ के आदेश में दर्ज तथ्यों एवं निर्देशों के आधार पर तैयार की गई है। खबर में किसी व्यक्ति को व्यक्तिगत रूप से दोषी, भ्रष्ट या अपराधी घोषित करने का उद्देश्य नहीं है। प्रशासनिक कार्रवाई अथवा आदेश में लगाए/उल्लेखित आरोपों को अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए। संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का पूरा अधिकार है। खबर की तहतक तथ्यात्मक, निष्पक्ष एवं विधिसम्मत पत्रकारिता के सिद्धांतों का पालन करते हुए संबंधित पक्ष का आधिकारिक स्पष्टीकरण प्राप्त होने पर उसे भी प्रकाशित करेगी।

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