खबर की तहतक न्यूज नेटवर्क नवगछिया/बिहार। जिस आंगन में कभी बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, जहां सुबह चूल्हे का धुआं उठता था और शाम को परिवार एक साथ बैठता था… आज उसी आंगन में पानी का कब्जा है। जिन गलियों से होकर लोग रोजमर्रा की जिंदगी जीते थे, वहां अब नावें चल रही हैं। बिहार के नवगछिया क्षेत्र के मदरौनी में बाढ़ ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। कई इलाकों में 5 से 6 फीट तक पानी भरने की स्थिति सामने आई है। घरों के भीतर तक पानी पहुंच चुका है और सड़कें पूरी तरह जलमग्न हैं। ऐसे हालात में लोगों की आवाजाही का एकमात्र बड़ा सहारा नाव बनी हुई है। जहां रास्ते थे, वहां अब पानी की लहरें हैं ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, मदरौनी और आसपास के इलाकों में पिछले करीब 20 दिनों से कोसी का पानी फैल रहा है। गांव की तस्वीर ऐसी है कि दूर-दूर तक सिर्फ मटमैला पानी दिखाई देता है। बाढ़ ने सिर्फ लोगों के घरों को नहीं घेरा, बल्कि उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को भी कैद कर दिया है। जरूरी सामान खरीदने, दवा लाने या एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए भी लोगों को नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। गंगा का उफान, कोसी की मुश्किल और बढ़ी स्थानीय लोगों के मुताबिक, गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण कोसी के पानी की निकासी प्रभावित हुई है। पानी आगे नहीं निकल पाने से पीछे की ओर फैलाव बढ़ रहा है और मदरौनी समेत आसपास के कई गांव इसकी चपेट में हैं। यानी एक तरफ नदी का उफान और दूसरी तरफ निकासी का संकट—इन दोनों के बीच फंसी है आम जिंदगी। स्कूल डूबे, मंदिर भी पानी से घिरे बाढ़ का असर घरों तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार मदरौनी क्षेत्र के कई स्कूल पानी में डूब गए हैं, जबकि नासीटोला का स्थानीय मंदिर भी बाढ़ के पानी से घिर गया है। बच्चों की पढ़ाई से लेकर बुजुर्गों की दवा और परिवारों के भोजन तक—हर जरूरत पानी की इस दीवार के पार दिखाई दे रही है। नाव नहीं, जैसे जिंदगी की डोर हो इन हालातों में नाव महज आने-जाने का साधन नहीं रह गई है। यही नाव किसी के लिए राशन पहुंचा रही है, किसी को दवा तक ले जा रही है और किसी परिवार को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने का माध्यम बन रही है। पानी के बीच फंसे लोगों की सबसे बड़ी चिंता यही है कि आखिर यह संकट कब खत्म होगा? ग्रामीणों की नजर अब गंगा के जलस्तर पर टिकी है। उनका कहना है कि जब तक गंगा का पानी नीचे नहीं जाएगा, कोसी के पानी की निकासी की समस्या बनी रह सकती है। यह सिर्फ बाढ़ का पानी नहीं है… यह उन परिवारों की आंखों में जमा चिंता है, जिनके घर पानी में हैं और उम्मीद किनारे पर। अब जरूरत सिर्फ राहत पहुंचाने की नहीं, बल्कि प्रभावित परिवारों तक भोजन, पेयजल, दवाइयां और आवश्यक सहायता लगातार पहुंचाने की है, ताकि पानी उतरने तक किसी जिंदगी की सांस संकट में न पड़े। डिस्क्लेमर: यह समाचार उपलब्ध ग्राउंड रिपोर्ट एवं प्रकाशित मीडिया रिपोर्टों में सामने आए तथ्यों के आधार पर तैयार किया गया है। बाढ़ की स्थिति, जलस्तर, प्रभावित लोगों की संख्या तथा प्रशासनिक राहत व्यवस्था समय के साथ बदल सकती है। खबर में प्रयुक्त भावनात्मक एवं प्रभावशाली भाषा का उद्देश्य आपदा की गंभीरता और प्रभावित लोगों की पीड़ा को रेखांकित करना है, किसी व्यक्ति, संस्था या प्रशासन के विरुद्ध आरोप स्थापित करना नहीं। पाठकों से अपील है कि आपदा की स्थिति में अफवाहों पर भरोसा न करें और स्थानीय प्रशासन/आपदा प्रबंधन विभाग के आधिकारिक निर्देशों का पालन करें। Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Like this:Like Loading… Related Post navigation हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी नहीं मिला मानदेय, डीएम ने उठाया सख्त कदम LPG बुकिंग नियम बदला: 45 दिन का इंतजार खत्म, अब 25 दिन में अगली बुकिंग