खबर की तहतक | नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम और दूरगामी असर वाले फैसले में स्पष्ट किया है कि एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के वे अभ्यर्थी, जो जनरल कैटेगरी के लिए निर्धारित कटऑफ से अधिक अंक प्राप्त करते हैं, उन्हें अनारक्षित (जनरल) सीटों पर ही समायोजित किया जाएगा। शीर्ष अदालत ने इसे संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 की भावना के अनुरूप बताया है। यह महत्वपूर्ण फैसला न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने सुनाया। अदालत ने कहा कि यह अब कानून का एक स्थापित सिद्धांत है कि यदि कोई आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार बिना किसी रियायत (जैसे आयु, शुल्क या अन्य छूट) का लाभ लिए सामान्य श्रेणी से बेहतर प्रदर्शन करता है, तो उसे खुले वर्ग (अनारक्षित श्रेणी) का ही उम्मीदवार माना जाएगा। ‘अनारक्षित’ कोई कोटा नहीं, योग्यता के लिए खुला मंच फैसले में न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा ने साफ शब्दों में कहा कि ‘अनारक्षित श्रेणी’ सामान्य वर्ग का कोटा नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह योग्यता आधारित खुला वर्ग है, जो सभी अभ्यर्थियों के लिए समान रूप से उपलब्ध है। अदालत ने कहा कि ऐसा करना अनुच्छेद-14 (कानून के समक्ष समानता) और अनुच्छेद-16 (सार्वजनिक रोजगार में अवसर की समानता) की संवैधानिक आवश्यकता है। केरल हाईकोर्ट का फैसला रद्द सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केरल हाईकोर्ट के वर्ष 2020 के फैसले को रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) को निर्देश दिया था कि वह मेधावी आरक्षित श्रेणी (MRC) के उम्मीदवारों को बाहर कर एक अनारक्षित उम्मीदवार को नियुक्त करे। शीर्ष अदालत ने इसे कानून के स्थापित सिद्धांतों के विपरीत बताया। आरक्षित कोटे को भी होगा लाभ सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जब कोई आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार जनरल सीट पर चयनित होता है, तो उसकी आरक्षित श्रेणी की सीट खाली रहती है, जिससे उस वर्ग के अगले सबसे योग्य उम्मीदवार को अवसर मिलता है। इससे आरक्षण व्यवस्था और अधिक न्यायसंगत एवं संतुलित बनती है। इस फैसले को योग्यता, समानता और सामाजिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिसका असर आने वाले समय में भर्तियों और चयन प्रक्रियाओं पर व्यापक रूप से देखने को मिलेगा। — खबर की तह तक Post navigation श्रवण धाम महोत्सव को लेकर प्रशासन सतर्क, डीएम व एसपी ने किया स्थल निरीक्षण बचाओ–बचाओ” की गूंज के बीच बुझ गई जिंदगी , साढ़े चार घंटे चले रेस्क्यू के बाद भी नहीं बच सका इंजीनियर, पिता के सामने टूटा सबसे बड़ा सहारा