UP: मतदाता सूची में वोटरों का पता गलत होना सामान्य बात, एसआईआर से कोई संबंध नहीं — आयोग ने सुधार के दिए निर्देश

खबर की तहतक | लखनऊ

उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची को लेकर उठे सवालों पर राज्य निर्वाचन आयोग ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि वोटर लिस्ट में मतदाताओं का गलत या एक जैसा पता दर्ज होना कोई नई बात नहीं है और इसका विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से कोई संबंध नहीं है। आयोग ने समाजवादी पार्टी द्वारा उठाए गए आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि यह स्थिति दशकों से चली आ रही है और अब इसे जड़ से सुधारने के लिए ठोस निर्देश जारी किए गए हैं।

राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी बयान में बताया कि कई मतदान केंद्रों की मतदाता सूचियों में असंबंधित व्यक्तियों के नामों के सामने एक जैसे मकान नंबर दर्ज होना एक सामान्य प्रशासनिक त्रुटि है। यह त्रुटि एसआईआर के कारण नहीं हुई, क्योंकि गणना चरण में मतदाता विवरण में कोई संशोधन नहीं किया गया।

गलत पते की वजह क्या है?

आयोग के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश घरों के स्थायी मकान नंबर नहीं होते, जबकि शहरी इलाकों में भी कई मकानों का आधिकारिक नंबर दर्ज नहीं है। ऐसे में वोटर लिस्ट में काल्पनिक (नोशनल) नंबर दर्ज किए जाते हैं। कई मामलों में शहरी क्षेत्रों में 0 या 00 को मकान नंबर के रूप में लिखा जाना आम चलन है।

नगर निकायों में कर निर्धारण के लिए वार्ड-वार जो रजिस्टर बनाए जाते हैं, उनमें भी नोशनल नंबर दिए जाते हैं, जिससे अलग-अलग वार्डों में रहने वाले परिवारों के मकान नंबर एक जैसे दिख सकते हैं।

रामपुर का उदाहरण

आयोग ने रामपुर जिले के मिलक नगर पालिका का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां दो अलग-अलग वार्डों में रहने वाले परिवारों के मकान नंबर वोटर लिस्ट में समान पाए गए। चूंकि विधानसभा की मतदाता सूची में वार्ड नंबर अंकित नहीं था, इसलिए दोनों परिवारों के वोट एक ही बूथ पर दर्ज दिखाई दिए। यह स्थिति अनुभागों के सही विभाजन न होने के कारण बनी।

सुधार के लिए दिए गए निर्देश

इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए आयोग ने सभी निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ERO) को निर्देश जारी किए हैं।

प्रत्येक मतदान क्षेत्र में पर्याप्त संख्या में स्पष्ट रूप से सीमांकित (Well-demarcated) अनुभाग बनाए जाएं।

डेटाबेस में मकान नंबर के साथ गली, मोहल्ला या सड़क का नाम अनिवार्य रूप से दर्ज किया जाए।

बीएलओ सुपरवाइजरों को अपने क्षेत्र के सभी बूथों की मतदाता सूचियों की गहन जांच कर त्रुटियों को समय रहते दुरुस्त कराने की जिम्मेदारी दी गई है।

आयोग का कहना है कि इन कदमों से न केवल पुनरीक्षण और चुनाव के दौरान मतदाताओं को ढूंढने में आसानी होगी, बल्कि एक जैसे मकान नंबर की समस्या से भी काफी हद तक निजात मिलेगी।

सपा ने उठाए थे सवाल

समाजवादी पार्टी ने हाल ही में मतदाताओं की संख्या में कमी और गलत पते दर्ज होने को लेकर सवाल खड़े किए थे। इन्हीं आरोपों के जवाब में आयोग ने यह स्पष्टीकरण जारी किया है।

राज्य निर्वाचन आयोग ने भरोसा दिलाया है कि अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने से पहले सभी त्रुटियों को दूर कर लिया जाएगा, ताकि मतदाताओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।

— खबर की तहतक ✍️

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