दो माह बाद लौटी खेत की मेड़, शिकायत से कार्रवाई तक पहुंचा मामला

खबर की तहतक न्यूज नेटवर्क

जलालपुर, अंबेडकरनगर।

खेत की मेड़ को लेकर करीब दो माह से शिकायतों के चक्कर काट रही महिला को आखिरकार राहत मिल गई। पुलिस अधीक्षक, उपजिलाधिकारी और मुख्यमंत्री पोर्टल तक शिकायत पहुंचने के बाद राजस्व विभाग सक्रिय हुआ और सोमवार को लेखपाल मौके पर पहुंचे। दोनों पक्षों की मौजूदगी में पूर्व में कायम मेड़ की स्थिति का निरीक्षण कर उसे उसी स्थान पर पुनः कायम कराया गया। पुलिस की मौजूदगी में मेड़ बंधवाकर खेत की यथास्थिति बहाल कर दी गई।

मामला कोतवाली जलालपुर क्षेत्र के लारपुर दक्षिण निवासी ज्ञानमती आदि और नगर पालिका फरीदपुर निवासी गुलाब चंद्र यादव उर्फ मट्टू यादव से जुड़ा है। ज्ञानमती पक्ष ने आरोप लगाया था कि 24 जून की रात करीब आठ बजे विपक्षी ने उनके खेत की मेड़ जुतवा दी। विरोध करने पर जान से मारने की धमकी देने का आरोप भी लगाया गया था।

सुबह खेत पहुंची तो गायब थी मेड़ की पुरानी स्थिति

पीड़िता के अनुसार, 25 जून की सुबह खेत पर पहुंचने पर मेड़ जोती हुई मिली। उन्होंने तत्काल डायल-112 पर सूचना देकर पुलिस को बुलाया और कार्रवाई की मांग की। इसके बाद पुलिस अधीक्षक, उपजिलाधिकारी और मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराकर मामले के समाधान की गुहार लगाई।

पीड़िता का कहना है कि लगातार शिकायतों के बावजूद समाधान में करीब दो माह लग गए। इस दौरान मेड़ का विवाद केवल जमीन की सीमा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि धान की समय से बुवाई भी प्रभावित हुई, जिससे किसान परिवार की परेशानी बढ़ती गई।

शिकायतों के बाद मौके पर पहुंचा राजस्व विभाग

मामले को लेकर शिकायतों के बाद राजस्व विभाग ने कार्रवाई शुरू की। अधिकारियों के निर्देश पर लेखपाल राकेश कुमार सिंह मौके पर पहुंचे। दोनों पक्षों की मौजूदगी में खेत की पूर्व स्थिति का निरीक्षण किया गया। इसके बाद पूर्व में कायम मेड़ के स्थान के आधार पर उसे पुनः उसी स्थिति में कायम कराने की कार्रवाई कराई गई।

पुलिस की मौजूदगी में मेड़ बंधवाकर खेत की यथास्थिति बहाल कर दी गई। इससे करीब दो माह से विवाद और शिकायतों के बीच फंसे मामले में फिलहाल राहत की स्थिति बनी है।

मीडिया पर आरोप से लेकर गलती स्वीकारने तक

इस मामले में पूर्व में खबर प्रकाशित होने के बाद आरोपी ग्राम प्रधान की ओर से मीडिया पर भी आरोप लगाए गए थे। हालांकि बाद में प्रधान पक्ष की ओर से मेड़ गलती से जुतवाए जाने की बात स्वीकार किए जाने की जानकारी सामने आई।

यहीं सवाल भी खड़ा होता है कि यदि मेड़ का जुतना महज गलती थी, तो एक किसान परिवार को अपनी जमीन की पुरानी स्थिति बहाल कराने के लिए पुलिस से लेकर प्रशासन और मुख्यमंत्री पोर्टल तक शिकायतों का सहारा क्यों लेना पड़ा? राजस्व विवाद की असली कीमत अक्सर कागजों में नहीं, बल्कि किसान के समय, फसल और मानसिक परेशानी में दिखाई देती है।

कानूनी रास्ता खुला, विवाद का फैसला अदालत में

लेखपाल ने स्पष्ट किया कि भूमि की सीमा, क्षेत्रफल अथवा मेड़ की स्थिति को लेकर किसी भी पक्ष को आपत्ति है तो वह निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत राजस्व न्यायालय में अपना पक्ष रख सकता है।

फिलहाल मौके पर पूर्व स्थिति के आधार पर मेड़ कायम करा दी गई है। हालांकि भूमि संबंधी अंतिम अधिकार अथवा स्वामित्व का निर्धारण इस कार्रवाई से नहीं माना जाएगा; ऐसे विवादों का विधिक समाधान सक्षम राजस्व न्यायालय की प्रक्रिया के माध्यम से ही होगा।

खबर की तहतक की पड़ताल:

शिकायत के करीब दो माह बाद मेड़ बहाल होना यह जरूर बताता है कि ग्रामीण स्तर के भूमि विवादों में समय पर राजस्व हस्तक्षेप कितना महत्वपूर्ण है। एक मेड़ छोटी दिखाई दे सकती है, लेकिन किसान के लिए वही उसकी फसल, मेहनत और हक की सीमा होती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed

Call Now Button