खबर की तहतक न्यूज़ नेटवर्क संवाददाता – अनिल यादव आजमगढ़, 18 अगस्त 2026। स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर आवाज उठा रहे छात्रों के समर्थन में अब किसान संगठन भी उतर आए हैं। सोशलिस्ट किसान सभा और पूर्वांचल किसान यूनियन ने छात्रों के आंदोलन को समर्थन देते हुए स्कूलों की व्यवस्था की सोशल ऑडिट कराने और किसानों-मजदूरों के बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने की मांग उठाई है। पूर्वांचल किसान यूनियन के महासचिव वीरेंद्र यादव और सोशलिस्ट किसान सभा के महासचिव राजीव यादव ने कहा कि गांव-कस्बों के बच्चों द्वारा स्कूलों में व्याप्त अव्यवस्थाओं के खिलाफ उठाई जा रही आवाज पूरी तरह जायज है। किसान संगठनों ने कहा कि बच्चों की शिक्षा से जुड़े सवालों की लड़ाई गांव, कस्बे और मोहल्ले तक लड़ी जाएगी। किसान नेताओं ने शिक्षा व्यवस्था में समानता का मुद्दा उठाते हुए सवाल किया कि जब ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ और ‘एक देश, एक टैक्स’ जैसी अवधारणाओं पर चर्चा हो सकती है तो ‘वन नेशन, वन एजुकेशन’ यानी पूरे देश में समान शिक्षा व्यवस्था की बात क्यों नहीं हो सकती? उन्होंने कहा कि किसान संगठन आगामी संसद के शीतकालीन सत्र में देश में समान शिक्षा व्यवस्था लागू करने के लिए कानून बनाने की मांग उठाएंगे। नेताओं के मुताबिक कॉमन स्कूल सिस्टम लागू होने से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को भी बेहतर शिक्षा के समान अवसर मिल सकेंगे। स्कूलों की बदहाली पर उठाए सवाल किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि देश के अनेक ग्रामीण प्राथमिक विद्यालय आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं। कहीं पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं तो कहीं बच्चों के बैठने के लिए डेस्क-बेंच तक उपलब्ध नहीं हैं। गर्मी और उमस के बीच कई विद्यालयों में पंखे, कूलर और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं को लेकर भी समस्याएं बताई गईं। उन्होंने विद्यालयों में शौचालय, स्वच्छ पेयजल, साफ-सफाई और मिड डे मील की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए। किसान संगठनों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों से बेहतर सुविधाओं वाले निजी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के साथ प्रतिस्पर्धा की उम्मीद की जाती है, लेकिन उन्हें समान बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता। बेरोजगारी और पेपर लीक के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा किसान नेताओं ने कहा कि देश में बेरोजगारी, भर्ती प्रक्रिया, भ्रष्टाचार और पेपर लीक जैसे मुद्दों को लेकर युवा लगातार संघर्ष कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर छात्र स्कूलों में बेहतर सुविधाओं, पर्याप्त शिक्षकों, अच्छी सड़कों और गुणवत्तापूर्ण मिड डे मील की मांग उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब बच्चे भी अपनी समस्याओं और अधिकारों को लेकर सवाल पूछ रहे हैं। सरकार और प्रशासन को बच्चों की आवाज को गंभीरता से लेते हुए विद्यालयों की वास्तविक स्थिति की समीक्षा करनी चाहिए। पूर्वांचल किसान यूनियन के महासचिव वीरेंद्र यादव तथा सोशलिस्ट किसान सभा के महासचिव राजीव यादव ने कहा कि किसानों और मजदूरों के बच्चों के भविष्य से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं होने दिया जाएगा। किसान संगठनों ने स्कूलों की जमीनी स्थिति की सोशल ऑडिट कराने की बात भी कही है। डिस्क्लेमर: यह समाचार उपलब्ध कराई गई प्रेस विज्ञप्ति/बयानों और संबंधित पक्षों द्वारा व्यक्त किए गए आरोपों, दावों एवं विचारों पर आधारित है। खबर में उल्लिखित किसी भी आरोप या टिप्पणी को ‘खबर की तहतक न्यूज़ नेटवर्क’ की ओर से सत्यापित तथ्य या अंतिम निष्कर्ष के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है। जिन बातों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है, उन्हें संबंधित पक्ष के बयान/दावे के रूप में ही प्रकाशित किया गया है। इस खबर में किसी व्यक्ति, संस्था, विभाग या सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाने का उद्देश्य नहीं है। संबंधित पक्ष को अपना पक्ष रखने का पूरा अधिकार है और सत्यापन योग्य आधिकारिक जानकारी अथवा खंडन प्राप्त होने पर उसे उचित स्थान दिया जाएगा। पाठकों से भी अपील है कि किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित आधिकारिक स्रोतों से तथ्यों की पुष्टि करें। खबर की तहतक न्यूज़ नेटवर्क तथ्यों की निष्पक्षता, संतुलन और पत्रकारिता के मानकों का सम्मान करता है। खबर की तहतक न्यूज़ नेटवर्क Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Like this:Like Loading… Related Post navigation सावन-नागपंचमी के संगम पर शीतला माता मंदिर में उमड़ी आस्था, भव्य आरती में झूमे श्रद्धालु जलालपुर में शुरू हुआ सेवा मल्टी हॉस्पिटल, ग्रामीणों को मिलेंगी सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं