काम दिलाने के बहाने युवती को मध्यप्रदेश ले जाकर बेचने का आरोप, महिला समेत तीन गिरफ्तार

खबर की तहतक | कांकेर/पखांजूर।

छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के बांदे थाना क्षेत्र से एक युवती को काम दिलाने का झांसा देकर मध्यप्रदेश ले जाने और कथित तौर पर 50 हजार रुपये में बेचकर उसकी शादी कराने का गंभीर मामला सामने आया है। पुलिस ने लगभग पांच महीने बाद महिला को मध्यप्रदेश से बरामद कर लिया है और इस प्रकरण में एक महिला समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

पुलिस के अनुसार, बांदे थाना क्षेत्र निवासी एक महिला के पति ने 9 अप्रैल 2026 को उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने महिला की तलाश शुरू की और विभिन्न स्तरों पर जांच की। जांच के दौरान महिला के मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में होने की जानकारी मिली।

सूचना मिलने पर बांदे थाना पुलिस की टीम मध्यप्रदेश पहुंची और लगातार प्रयास के बाद 5 अगस्त 2026 को महिला को बरामद कर सुरक्षित वापस लाई। पूछताछ में महिला ने बताया कि अनीता पवार, जमना लाल भील और जितेंद्र राठौर ने उसे काम दिलाने का झांसा दिया था। आरोप है कि उसे मध्यप्रदेश ले जाकर कथित रूप से 50 हजार रुपये में जितेंद्र राठौर को सौंप दिया गया और बाद में उसकी शादी करा दी गई।

महिला के बयान के आधार पर पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की। जांच के बाद पुलिस ने अनीता पवार, जितेंद्र राठौर और जमना लाल भील को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के पास से दो मोबाइल फोन भी बरामद किए गए हैं, जिनकी जांच की जा रही है।

पुलिस ने बताया कि मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 143(2), 61(2), 127(4) और 87 के तहत अपराध दर्ज किया गया है। प्रकरण की विवेचना जारी है और अन्य लोगों की संलिप्तता की भी जांच की जा रही है।

कांकेर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि रोजगार, शादी या अन्य लालच देकर दूसरे राज्यों में ले जाने की किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें। पुलिस ने अपराध संबंधी सूचना के लिए हेल्पलाइन नंबर 94791-55125 जारी किया है।

यह मामला ग्रामीण एवं सीमावर्ती क्षेत्रों में रोजगार के नाम पर महिलाओं और युवतियों को बहला-फुसलाकर दूसरे राज्यों में ले जाने की घटनाओं को लेकर गंभीर चिंता पैदा करता है।

डिस्क्लेमर :

यह समाचार पुलिस द्वारा जारी जानकारी एवं उपलब्ध समाचार स्रोतों के आधार पर प्रकाशित किया गया है। मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायालय अथवा जांच एजेंसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी। गिरफ्तार व्यक्तियों को कानून के अनुसार न्यायालय द्वारा दोष सिद्ध होने तक निर्दोष माना जाता है। खबर की तहतक पाठकों से अपुष्ट सूचनाओं पर विश्वास न करने और आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील करता है।

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