खबर की तहतक | विशेष रिपोर्ट नई दिल्ली। उत्तर भारत इन दिनों कड़ाके की ठंड की चपेट में है। मैदानों से लेकर पहाड़ों तक लोग ठिठुरने को मजबूर हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में एक ऐसा गांव भी है, जहां ठंड की कल्पना मात्र से ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं? यह गांव है द्रास (Dras), जिसे भारत का ही नहीं बल्कि दुनिया के सबसे ठंडे आबाद इलाकों में गिना जाता है। ❄️ सांस छोड़ते ही जम जाती है हवा लद्दाख के कारगिल जिले में स्थित द्रास को अक्सर “भारत का साइबेरिया” कहा जाता है। सर्दियों के मौसम में यहां का तापमान माइनस 40 से माइनस 60 डिग्री सेल्सियस तक चला जाता है। हालात ऐसे होते हैं कि सांस से निकलने वाली भाप तक जम जाती है और गीले कपड़े खुले में रखने पर कुछ ही मिनटों में बर्फ बन जाते हैं। 🏔️ बेहद कठिन है जनजीवन इस भीषण ठंड में द्रास के लोग बेहद कठिन परिस्थितियों में जीवन बिताते हैं। कई महीनों तक गांव का संपर्क बाकी दुनिया से कट जाता है। सड़कों पर मोटी बर्फ की चादर जम जाती है और रोजमर्रा की जरूरतों का सामान पहले से जमा करके रखा जाता है। बच्चे स्कूल नहीं जा पाते और लोग घरों के भीतर ही सीमित रहते हैं। 🔥 आग और ऊनी कपड़े ही सहारा यहां के लोग लकड़ी, कोयला और पारंपरिक हीटर का इस्तेमाल कर ठंड से बचते हैं। ऊनी कपड़े, फर की टोपी और मोटे जूते यहां जीवन का अनिवार्य हिस्सा हैं। बावजूद इसके, माइनस तापमान में सामान्य जीवन जीना किसी चुनौती से कम नहीं। 🌍 दुनिया भर में मशहूर द्रास सिर्फ ठंड के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी प्राकृतिक सुंदरता और सामरिक महत्व के लिए भी जाना जाता है। यह इलाका कारगिल युद्ध के कारण भी इतिहास में दर्ज है। सर्दियों में यहां का नजारा किसी बर्फीले सपने जैसा होता है, लेकिन रहना बेहद कठिन। 🤔 क्या आप रह पाएंगे यहां? सोचिए, जहां पानी जम जाता हो, सांस तक भारी लगने लगे और महीनों तक सूरज की गर्मी न मिले—क्या आप वहां रहना चाहेंगे? द्रास के लोग अपने हौसले और जिजीविषा से यह साबित करते हैं कि इंसान हर परिस्थिति में जीने का रास्ता खोज ही लेता है। — खबर की तहतक वेब पोर्टल की विशेष प्रस्तुति Post navigation यूपी में 15 जनवरी को सार्वजनिक अवकाश घोषित, मकर संक्रांति के चलते योगी सरकार का फैसला अंबेडकरनगर के अहरिया में बनेगा सीवर ट्रीटमेंट प्लांट, भूमि चिह्नित; शहर को मिलेगी स्वच्छता की नई पहचान