खबर की तहतक | विशेष पड़ताल अम्बेडकरनगर। विकास खंड भियांव की ग्राम पंचायत मधवापुर में कराए गए विभिन्न विकास कार्यों को लेकर ग्रामीणों ने पारदर्शिता और वित्तीय जवाबदेही पर सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत स्तर पर कई कार्यों पर लाखों रुपये खर्च दर्शाए गए हैं, जबकि उनके अनुसार अनेक कार्यों की स्थिति धरातल पर स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देती। ग्रामीणों के मुताबिक मनरेगा पार्क की रंगाई-पुताई, मिट्टी पटाई, हैंडपंप मरम्मत, शौचालय निर्माण एवं मरम्मत, आंगनबाड़ी केंद्र से जुड़े कार्यों तथा कायाकल्प योजना के अंतर्गत विभिन्न मदों में व्यय दर्ज किया गया है। उनका कहना है कि इन कार्यों की वास्तविक स्थिति और व्यय के अनुपात को लेकर स्थानीय स्तर पर कई प्रश्न उठ रहे हैं। ग्रामीणों का दावा है कि पंचायत से संबंधित कुछ कार्यों का विवरण विभिन्न सरकारी पोर्टलों पर दर्ज है, लेकिन कई मामलों में कार्यों से जुड़ी तस्वीरें अथवा अन्य विवरण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं। इसके अतिरिक्त, व्यय से संबंधित बिल एवं वाउचर आम नागरिकों की पहुंच से बाहर होने की बात भी ग्रामीणों द्वारा कही जा रही है। उनका तर्क है कि सार्वजनिक धन से होने वाले विकास कार्यों का पूरा विवरण आमजन के लिए सुलभ होना चाहिए ताकि पारदर्शिता बनी रहे और किसी प्रकार की आशंका को दूर किया जा सके। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि सभी कार्य नियमानुसार और गुणवत्ता के साथ संपन्न हुए हैं तो संबंधित अभिलेखों एवं भुगतान संबंधी दस्तावेजों को सार्वजनिक करने में किसी प्रकार की आपत्ति नहीं होनी चाहिए। ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष तकनीकी, वित्तीय एवं भौतिक जांच कराने की मांग की है, ताकि विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। ग्रामीणों का यह भी दावा है कि इस प्रकार की शिकायतें केवल मधवापुर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि क्षेत्र की अन्य ग्राम पंचायतों में भी पारदर्शिता को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में वे व्यापक स्तर पर जांच कराए जाने की मांग कर रहे हैं। मामले को लेकर संबंधित ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सचिव अथवा अन्य जिम्मेदार अधिकारियों का पक्ष समाचार लिखे जाने तक प्राप्त नहीं हो सका। खबर की तहतक निष्पक्ष पत्रकारिता के सिद्धांतों का पालन करते हुए संबंधित पक्ष का जवाब प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित करेगा। ग्रामीणों की प्रमुख मांगें ✔ विकास कार्यों का भौतिक सत्यापन कराया जाए। ✔ व्यय से संबंधित बिल, वाउचर एवं अभिलेख सार्वजनिक किए जाएं। ✔ तकनीकी एवं वित्तीय ऑडिट कराया जाए। ✔ जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक कर जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। डिस्क्लेमर यह समाचार स्थानीय ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों, उपलब्ध अभिलेखीय सूचनाओं तथा प्राप्त शिकायतों के आधार पर तैयार किया गया है। समाचार में उल्लिखित सभी आरोप संबंधित व्यक्तियों एवं ग्रामीणों के दावे हैं, जिनकी स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि अभी शेष है। खबर की तहतक किसी भी व्यक्ति, संस्था अथवा पंचायत को दोषी घोषित नहीं करता। मामले की वास्तविक स्थिति सक्षम प्रशासनिक, तकनीकी अथवा जांच एजेंसी की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। संबंधित ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सचिव एवं अन्य पक्षों का स्पष्टीकरण प्राप्त होने पर उसे यथावत प्रकाशित किया जाएगा। Post navigation मोदी कैबिनेट विस्तार की अटकलें तेज: यूपी से पंजाब तक बढ़ सकता है दबदबा, क्या बागी नेताओं को भी मिलेगा मौका? अकबरपुर में महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत, पुलिस जांच में जुटी