लखनऊ लाठीचार्ज के विरोध में जलालपुर बार एसोसिएशन का उग्र प्रदर्शन, राज्यपाल के नाम सौंपा ज्ञापन; अधिवक्ताओं ने उठाईं कई बड़ी मांगें

वेब पोर्टल: खबर की तहतक ✍️

जलालपुर, अम्बेडकरनगर।

राजधानी लखनऊ में अधिवक्ताओं पर हुए कथित लाठीचार्ज की घटना को लेकर प्रदेश भर में अधिवक्ताओं के बीच नाराजगी का माहौल देखने को मिल रहा है। इसी क्रम में बुधवार को जलालपुर बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों और अधिवक्ताओं ने एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए जोरदार विरोध जताया। अधिवक्ताओं ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए महामहिम राज्यपाल उत्तर प्रदेश के नाम संबोधित ज्ञापन उपजिलाधिकारी जलालपुर राहुल गुप्ता एवं ग्राम न्यायालय जलालपुर के अधिकारी आश्री शाह को सौंपा।

बार परिसर में एकत्र हुए अधिवक्ताओं ने कहा कि न्याय व्यवस्था से जुड़े लोगों पर यदि इस प्रकार की घटनाएं होती हैं तो यह गंभीर चिंता का विषय है। प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने कथित लाठीचार्ज की उच्चस्तरीय जांच कराने और इस प्रकरण में दर्ज मुकदमों को तत्काल वापस लेने की मांग उठाई।

ज्ञापन के माध्यम से अधिवक्ताओं ने मांग की कि जिन पुलिस अधिकारियों द्वारा कथित रूप से अनावश्यक बल प्रयोग किया गया, उनके खिलाफ विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही लखनऊ में जिन अधिवक्ताओं के चैंबर क्षतिग्रस्त या ध्वस्त किए गए हैं, उनका पुनर्निर्माण कर उचित मुआवजा दिया जाए।

अधिवक्ताओं ने भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए प्रदेश के सभी बार एसोसिएशन में अधिवक्ताओं के बैठने की समुचित व्यवस्था तथा आधुनिक सुविधाओं से युक्त बहुमंजिला चैंबर निर्माण की भी मांग रखी। इसके अलावा अधिवक्ता सुरक्षा कानून (एडवोकेट प्रोटेक्शन बिल) लागू करने, वरिष्ठ अधिवक्ताओं के लिए पेंशन व्यवस्था शुरू करने और जूनियर अधिवक्ताओं को स्थायी आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।

प्रदर्शन में बार एसोसिएशन अध्यक्ष कृपा शंकर मौर्य, वरिष्ठ उपाध्यक्ष हाशिम राजा एडवोकेट, कनिष्ठ उपाध्यक्ष योगेश कुमार शुक्ला एडवोकेट, मंत्री घनश्याम वर्मा एडवोकेट, उपमंत्री सुभाष कुमार एडवोकेट, कोषाध्यक्ष चंद्र विजय एडवोकेट, ऑडिटर यशोदानंद एडवोकेट, मोहम्मद फैज़ रजा एडवोकेट सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे।

प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने स्पष्ट कहा कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र और सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जा सकता है। पूरे घटनाक्रम में अधिवक्ताओं ने एकजुटता का संदेश देते हुए अपनी आवाज बुलंद की।

डिस्क्लेमर:

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