खबर की तहतक ✍️ श्रीकाकुलम। जनसंख्या वृद्धि दर में आ रही कमी को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए आंध्र प्रदेश सरकार ने परिवारों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से नई योजना की घोषणा की है। मुख्यमंत्री N. Chandrababu Naidu ने श्रीकाकुलम जिले के नरसन्नपेटा में आयोजित एक जनसभा के दौरान तीसरे और चौथे बच्चे के जन्म पर आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया। मुख्यमंत्री ने घोषणा करते हुए कहा कि सरकार ने इस प्रस्ताव को अंतिम रूप दे दिया है और यह योजना तत्काल प्रभाव से लागू की जाएगी। प्रस्तावित योजना के अनुसार तीसरे बच्चे के जन्म पर परिवार को ₹30,000 और चौथे बच्चे के जन्म पर ₹40,000 की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। योजना से संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश अगले एक महीने के भीतर जारी किए जाने की बात भी कही गई। सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बदलते सामाजिक और आर्थिक परिवेश में परिवारों का आकार लगातार छोटा होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि कई परिवार अब सीमित बच्चों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिसका प्रभाव भविष्य में जनसंख्या संरचना और कार्यबल पर पड़ सकता है। मुख्यमंत्री ने जनसंख्या संतुलन बनाए रखने के लिए कुल प्रजनन दर (TFR) के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि स्थिर जनसंख्या के लिए लगभग 2.1 की रिप्लेसमेंट दर आवश्यक मानी जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया के कई देशों में घटती और वृद्ध होती आबादी ने आर्थिक विकास और श्रम शक्ति पर असर डाला है। अपने संबोधन में उन्होंने बच्चों को परिवार और समाज की महत्वपूर्ण पूंजी बताते हुए कहा कि बच्चों को बोझ नहीं बल्कि भविष्य की शक्ति और संपत्ति के रूप में देखा जाना चाहिए। विशेषज्ञ मानते हैं कि जनसंख्या संबंधी नीतियों का प्रभाव केवल जन्म दर तक सीमित नहीं होता, बल्कि इसका संबंध शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, रोजगार और सामाजिक संरचना से भी जुड़ा होता है। ऐसे में किसी भी नई नीति के प्रभाव का मूल्यांकन उसके व्यापक सामाजिक और आर्थिक संदर्भ में किया जाना आवश्यक है। डिस्क्लेमर: यह समाचार सार्वजनिक मंच पर की गई घोषणा और उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। योजना की अंतिम पात्रता, नियम, प्रक्रिया और शर्तें संबंधित सरकारी अधिसूचना जारी होने के बाद ही स्पष्ट होंगी। “खबर की तहतक” परिवार नियोजन, मातृ स्वास्थ्य, बच्चों के अधिकार और सामाजिक संवेदनशीलता जैसे विषयों को गंभीरता से देखता है। हमारा उद्देश्य केवल तथ्यात्मक जानकारी साझा करना है, न कि किसी व्यक्ति, समुदाय या पारिवारिक निर्णय के पक्ष या विपक्ष में राय देना। परिवार से जुड़े निर्णय व्यक्तिगत परिस्थितियों, स्वास्थ्य और सामाजिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर लिए जाने चाहिए। Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Like this:Like Loading… Related Post navigation ईद-उल-अजहा और गंगा दशहरा पर शांति व सौहार्द बनाए रखने को पीस कमेटी की बैठक संपन्न आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण के आरोप में पत्नी और सास गिरफ्तार, पुलिस ने की कार्रवाई