सांसद-विधायकों के सम्मान को लेकर यूपी सरकार सख्त, अधिकारियों के लिए नया प्रोटोकॉल जारी

खबर की तहतक ✍️

लखनऊ।

उत्तर प्रदेश सरकार ने जनप्रतिनिधियों के सम्मान और प्रशासनिक प्रोटोकॉल के पालन को लेकर सख्त रुख अपनाया है। मुख्य सचिव एसपी गोयल की ओर से जारी शासनादेश में प्रदेश के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को सांसदों एवं विधायकों के प्रति सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। शासनादेश के अनुसार, जनप्रतिनिधियों के कार्यालय पहुंचने पर अधिकारियों को उठकर उनका अभिवादन करना होगा, हाथ जोड़कर सम्मान देना होगा तथा आवश्यक शिष्टाचार का पालन भी करना होगा।

जारी आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सांसदों और विधायकों के फोन कॉल का जवाब देना अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी। यदि किसी कारणवश अधिकारी तत्काल कॉल रिसीव नहीं कर पाते हैं, तो बैठक अथवा अन्य कार्य समाप्त होने के बाद उन्हें वापस संपर्क कर जवाब देना होगा। शासनादेश में कहा गया है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधियों के साथ गरिमापूर्ण व्यवहार प्रशासनिक जिम्मेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

मुख्य सचिव ने अपने आदेश में यह भी उल्लेख किया है कि पूर्व में भी इस संबंध में कई शासनादेश जारी किए जा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद जनप्रतिनिधियों के साथ प्रोटोकॉल का पालन न किए जाने की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। इसे गंभीर विषय मानते हुए अब अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देशों का कड़ाई से पालन करने को कहा गया है। शासनादेश में चेतावनी दी गई है कि यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी जनप्रतिनिधियों के प्रति असम्मानजनक व्यवहार करता है, तो उसके खिलाफ ‘उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी आचरण नियमावली’ के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

इसी क्रम में मुख्य सचिव ने प्रदेश में आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत को लेकर भी सभी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक पुराने मामलों के निस्तारण के लिए विभागीय स्तर पर समन्वय स्थापित किया जाए तथा बैंक रिकवरी, कंपाउंडिंग और अन्य लंबित मामलों के समाधान पर विशेष ध्यान दिया जाए। साथ ही डिजिटल माध्यमों के जरिए आम लोगों को लोक अदालत के प्रति जागरूक करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

प्रदेश सरकार के इस फैसले को प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर संवाद तथा लोकतांत्रिक मर्यादा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, इस शासनादेश को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चाओं का दौर भी तेज हो गया है।

डिस्क्लेमर:

यह खबर विभिन्न मीडिया स्रोतों और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। ‘खबर की तहतक’ वेब पोर्टल इस खबर में प्रकाशित दावों अथवा शासनादेश की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है।

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